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ऐतिहासिक फूलों के ताजिये की जगह चौकी पर जियारत

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आगरा। मोहर्रम की नौवीं तारीख पर बृहस्पतिवार को पाय चौकी स्थित 322 साल पुराना फूलों के ताजिया नहीं रखा गया। इस ताजिये को रखने की चौकी की ही जियारत की गई और फातिहा ख्वानी हुई। सुबह से शाम तक जायरीन के आने का सिलसिला चलता रहा। वहीं बेगम ड्यौढ़ी, पाय चौकी में घरों में भी ताजिये सजाए गए।
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संक्रमण के कारण इस बार भी ताजियेदारी कम स्थानों पर ही की गई है। मोहर्रम के जुलूस दसवीं पर निकाले जाने थे, लेकिन इस बार ज्यादातर वही ताजिये रखे गए हैं, जिन्हें दफनाया नहीं जाता है। कुछेक स्थानों पर मोहर्रम की सातवीं को ताजिये रखे गए हैं, जिन्हें कोविड प्रोटोकॉल के तहत दफनाया जाएगा।
अबुल उलाई शेख कमेटी के सूफी बुंदन मियां ने बताया कि बेगम ड्योढ़ी में हजरत इमाम हुसैन का रोजा लगाया गया है। इसकी जियारत करने लोग पहुंच रहे हैं। दूसरी ओर, शिया इमामबाड़ों में नौवीं को मजलिसों का दौर चलता रहा। मुस्लिम विद्वानों ने कर्बला की जंग का जिक्र किया और हजरत इमाम हुसैन को याद किया।
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ऐतिहासिक फूलों के ताजिये के चौधरी हाजी सरफराज खान ने बताया कि वर्ष 1947 के बाद दूसरी बार फूलों के ताजिये के जगह चौकी रखी गई है। ताजियेदारों की दसवीं पीढ़ी के चौधरी सरफराज ने बताया कि उनके बुजुर्गों ने बताया कि 1947 में बंटवारे के बाद देश में हालात अच्छे नहीं थे, तब पहली बार यहां ताजिया नहीं रखा गया था, इसकी जगह चौकी रखी गई थी। पिछले साल कोरोना संक्रमण के दौरान न चौकी रखी गई और न ही ताजिया ही रखा गया था। इस बार चौकी रखी गई है।
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