कान्हा की क्रीड़ा स्थली नंदगांव में कृष्ण काल की कई निशानियां बिना उचित संरक्षण के विलुप्त होने के कगार पर हैं। इन बहुमूल्य निशानियों की न तो स्थानीय लोगों को और न ही शासन प्रशासन को इनके संरक्षण की फिक्र है।
इन धरोहरों को सुरक्षित रखने के कोई भी प्रयास नहीं किए गए हैं। प्रचार प्रसार के अभाव में और प्रशासन की नीरसता के चलते तमाम श्रद्धालु कृष्ण के इन निशानों तक पहुंच ही नहीं पाते। इन अमूल्य धरोहरों पर थोड़ा भी ध्यान दिया जाए तो ये निशान और भी लंबे समय तक संरक्षित हो सकते हैं। इनके संरक्षण से निश्चित ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
हाऊ बिलाऊ
मान्यता है कि कृष्ण काल में कंस ने कृष्ण को मारने के लिए राक्षस भेजे थे। सांडिल्य ऋषि के श्राप के चलते राक्षस पाषाण के बन गए। यशोदा मैया कुंड में कन्हैया को जाने से रोकने के लिए इन प्रतिमाओं से डराती थीं।
जंगल में बसे हाऊ बिलाऊ की 4 प्रतिमाओं में से 2 को करीब डेढ़ दशक पूर्व पाषाण तस्करों द्वारा चुरा लिया गया। बताया गया कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उन दिनों उनकी कीमत करोड़ों में थी। 2 मूर्तियां भी संरक्षण के अभाव में जीर्ण शीर्ण होती चली जा रही हैं।