यह था मामला
मनोज शर्मा ने 4 अप्रैल को केस दर्ज कराया था। बताया था कि 3 अप्रैल की रात कार सवार 4 लोगों ने उन्हें उठाया। सरैंधी चौकी ले गया वहां बेरहमी से पीटा। परिजन को फोन करके दो लाख रुपये पुलिस चौकी पर लाने का दबाव बनाया। रकम नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दी। धमकाने वालों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया था। पत्नी को उसकी (मनोज की) मौत की झूठी खबर तक दे दी। इसी सदमे में पत्नी ने जहर खाकर जान दे दी। घटना के प्रकाश में आने पर अफसरों ने एक दरोगा और तीन सिपाही निलंबित कर दिए। दर्ज कराए केस में पुलिसकर्मियों के गुर्गे रवि पचौरी और काकी परमार को नामजद किया गया था। बाकी आरोपी अन्य में रखे गए थे।
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उठ रहे हैं ये सवाल
1 - मुकदमे में अपहरण कार से लिखाया गया। पुलिस ने लिखापढ़ी में कार को शामिल नहीं किया।
2 - मुकदमे में चार लोगों के अपहरण करने की बात लिखाई गई। पुलिस की कहानी में तीन पुलिसकर्मी उसे लेकर आए थे।
3 - जेल भेजने की धमकी देकर दो लाख रुपये मांगे। प्राइवेट आदमी जेल भेजने की धमकी कैसे दे सकते हैं। पुलिस जब उनसे नहीं मिली थी।
4 - रवि पचौरी और सिपाही सागर के बीच क्या संबंध है। रवि के एक फोन पर सिपाही कार से कैसे पहुंच गया।
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