ये बातें फतेहाबाद रोड स्थित होटल में शुक्रवार को आगरा मीनोपॉज सोसाइटी की कार्यशाला में सामने आईं। ऐसे लोगों को विशेषज्ञ को दिखाने की जरूरत बताई गई। अध्यक्ष डॉ. संजना महेश ने बताया कि 35 से 50 साल की उम्र में ये दिक्कत पनपती है। माहवारी बंद होने से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्माेंस बंद होने लगते हैं। इससे महिला के व्यवहार में तेजी से बदलाव आता है। इसमें चिड़चिड़ापन, जल्दी गुस्सा आना, घबराहट, पसीना अधिक आना, घबराहट में नींद टूटने जैसी परेशानी होने लगती है।
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पूर्व अध्यक्ष डॉ. सविता त्यागी ने कहा कि कई महिलाएं इसे माहवारी संबंधी परेशानी मानकर नजरअंदाज करती हैं। इससे बीमारी बढ़ जाती है। मनोचिकित्सक डॉ. विशाल सिन्हा और न्यूरोफिजीशियन डॉ. एमपी सिंह ने मीनोपॉज के वक्त विशेषज्ञों से परामर्श लेने की सीख दी।
सचिव डॉ. कीया पाराशर, डॉ. अंजू शर्मा, डॉ. निधि बंसल, डॉ. आरती गुप्ता, डॉ. गरिमा, डॉ. रत्ना शर्मा, डॉ. सुनीता पंजवानी, डॉ मधु राजपाल, डॉ. संतोष सिंघल, डॉ. रश्मि सिंह ने भी व्याख्यान दिए।
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