रेकी के बाद करते वारदात
गैंग पांच-छह की संख्या में एक जिले में जाता है। यह दो गुट में बंट जाते हैं। एक गुट पुलिसकर्मी बनता है तो दूसरा बाबा बन जाता है। सदस्य वहां दो पहिया और चार पहिया वाहन किराये पर लेते हैं। रेकी करके शिकार बनाने वाले को रोकते हैं।
सावधान : पुलिस कभी नहीं उतरवाती गहने
एसएसपी सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि टप्पेबाज गैंग की धरपकड़ के लिए टीम लगी है। एक नए गैंग के बारे में खुफिया जानकारी मिली है। इस पर टीम लगाई गई है। इसके अलावा हाल में जेल से छूटकर आए टप्पेबाज गैंग के सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है।
अगर, रास्ते में कोई बाबा और पुलिसकर्मी बनकर रोकता है, गहने उतारने के बारे में कहता है तो समझ जाएं कि वारदात हो सकती है। पुलिस कभी किसी व्यक्ति को अपने गहने उतारने के लिए नहीं कहती है। बाजार में व्यापारी वर्ग ज्यादा माल लेकर जा रहा है तो पुलिस की सहायता लें। रास्ते में मिलने वाले संदिग्ध लोगों के झांसे में नहीं आए। इसकी सूचना पुलिस को दें।
ये हो चुकी हैं वारदात
- छह नवंबर को सीताराम कॉलोनी निवासी व्यापारी सुनील कुमार अग्रवाल को पुलिसकर्मी बनकर रोककर पांच लाख के गहने ले गए।
- राजेश्वर मंदिर के पास पुलिसकर्मी बनकर महिला को रोका। उनसे चेन उतरवाकर ले गए थे। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया।
- सेब का बाजार में व्यापारी के कर्मचारी को बाबा बताकर रोका गया। इसके बाद उसे झांसे में लेकर थैला रखवा लिया। उससे 27 किलोग्राम चांदी ले गए।