आगरा में 2.12 लाख करोड़ रुपये के निवेश और 203 प्रोजेक्ट कागजों से बाहर नहीं आ सके। बीते फरवरी में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में यहां 2.18 लाख करोड़ रुपये कीमत के निवेश से 298 प्रोजेक्ट का सपना देखा गया था। आयोजन के समय यह यह केवल सपना नहीं बल्कि एमओयू हस्ताक्षर के दावे से लबरेज था। प्रदेश में तीसरे स्थान के भारी-भरकम निवेश की वजह से शासन से पीठ भी ठोकी गई थी। पर, दो महीने बाद जब धरातल पर निवेश को उतारने की बारी आई तो यह निवेश 13,500 करोड़ रुपये पर आ अटका और प्रोजेक्ट भी घटकर 95 पर रह गए हैं। फिलहाल तमाम कवायद के बाद भी विभाग व प्रशासन ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए केवल इतने ही प्रोजेक्ट को शिलान्यास के लिए तैयार कर सका है।
2.18 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में 80 फीसदी हिस्सेदारी हांगकांग (चीन) की कंपनी कर रही है। चीन की यह कंपनी 1.80 लाख करोड़ रुपये निवेश कर सूक्ष्म, लघु उद्योगों से लेकर शिक्षा, कौशल विकास, कपड़ा उद्योग में निवेश को आतुर है। सबसे बड़ा निवेश इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण में करेगी। जिसके लिए 99 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव है।
इसके अलावा दूसरी ई-वाहन कंपनी स्थापित करने के लिए 54 हजार करोड़ रुपये का एमओयू साइन किया गया है। 10 क्षेत्रों में निवेश से कंपनी 65 हजार लोगों को रोजगार देने का दावा करती है। कंपनी को 500 एकड़ से अधिक भूमि चाहिए।
जिन उद्योगों में भारी-भरकम निवेश होना है, उनके लिए जमीन नहीं मिल रही। यूपीएसआईडीसी व अन्य विभागों के पास उद्योगों के लिए भूमि नहीं। महुअर स्थित लेदर पार्क में भूमि है, लेकिन यहां भू उपयोग को लेकर मामला अदालत में विचाराधीन है। उपायुक्त उद्योग अनुज कुमार का कहना है कि उद्यमियों को जमीन की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ेगी। सरकार उन्हें भूमि खरीद पर स्टांप ड्यूटी में छूट देगी।