खेरागढ़ में बेटों से ज्यादा बेटियों का हुआ जन्म
खेरागढ़ में वर्ष 2015 में साल भर में 1987 बेटे और 1849 बच्चियों का जन्म हुआ था। वर्ष 2020 की बात करें तो 1408 बालक और 1446 बच्चियों का जन्म हुआ है। खंदौली में 3224 बालकों के मुकाबले 2703 बच्चियां जन्मीं, जो 2015 में सबसे कम दर थी। 2020 में यहां भी सुधार हुआ और वर्ष 2009 के मुकाबले 1815 बच्चियां पैदा हुईं।
ये रहे कारण
पीसीपीएनडीटी एक्ट: प्री कंस्पेप्शन एंड प्री नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक्सि कानून में दोष सिद्ध होने पर चिकित्सक और भ्रूण लिंग जांच कराने वाले को तीन से पांच साल की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना है।
बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ: बेटियों की कमी पर ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ के अभियान से लोगों में जागरूकता आई। बेटियों की शिक्षा और सेहत समेत अन्य योजनाओं का लाभ दिए जाने से परिजनों को सुविधा मिली।
सफलता का मुकाम: जब बेटियों की बेटों की तरह से शिक्षा, सेहत और भविष्य पर ध्यान दिया जाने लगा तो राजनीति, खेलकूद, अंतरिक्ष, सेना समेत अन्य उच्च पदों पर पहुंचकर परिजन और अपने शहर का नाम रोशन करने लगीं।