एसएसपी के मुताबिक, पूछताछ में शिवांशु ने बताया कि रामबहादुर उनके ताऊ थे। रामबहादुर और उनके परिजनों ने भोगीपुरा स्थित उनकी दुकानों पर कब्जा कर लिया था। इसको लेकर कई बार विवाद हुआ। दीवानी परिसर में भी महान से उनकी कहासुनी हुई थी। दूसरे चाचा तारकेश्वर की दुकानों पर भी कब्जा जमा लिया था। पुलिस से शिकायत की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इससे परेशान होेकर ही घटना की।
हत्यारोपियों के निशाने पर वो थे
मृतक के बेटे महान मुद्गल ने कहा कि दुकानें उनकी पुश्तैनी जमीन पर बनी हैं। अवैध कब्जे के लिए सैयद उर्फ शानू मदद कर रहा है। उसने दुकानों के फर्जी कागजात तैयार करा दिए हैं। किरायेदारी की फर्जी रसीद भी आरोपी काट रहे हैं। दुकानें वक्फ बोर्ड की जमीन पर दिखाने का प्रयास किया जा रहा था। मगर, आरोपी उनकी पैरवी की वजह से अपने मंसूबे में सफल नहीं हो पा रहे हैं। हत्यारोपियों के निशाने पर वो थे। पिता भूसे की टाल पर बैठे थे। संयोग से वह दूर चले गए थे। इस पर पिता की हत्या कर दी।
नामजद आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से पूरी घटना को अंजाम दिया।
शिवांशु मुद्गल उनका चचेरा भाई है। वह ताजगंज क्षेत्र में रहने वाले अपने रिश्तेदार से हथियार लेकर आया था। नामजद आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से पूरी घटना को अंजाम दिया। पुलिस गहनता से जांच करे तो सब कुछ सामने आ सकता है। कॉल डिटेल खंगाली जाए। पुलिस ने अभी सभी आरोपी नहीं पकड़े हैं। ऐसे में उनकी और परिवार की जान को खतरा है। दो दिन पुलिस घर के बाहर रही। इसके बाद पुलिस फोर्स हटा ली गई। इस कारण वो घर से बाहर भी नहीं निकल पा रहे हैं।
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