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Agra News: बेटी पढ़ाओ के दौर में पिछड़ गए बेटे, 58 प्रतिशत ने छोड़ा स्कूल

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आगरा। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के दौर में शहर के बेटे पिछड़ रहे हैं। बात चाहे बुनियादी शिक्षा की हो या फिर माध्यमिक की, दोनों स्तर पर बेटियां डटी हुई हैं। कम से कम विभागीय आंकड़े तो शिक्षा की यही तस्वीर दिखा रहे हैं। साल 2025-26 में 12 वीं तक के कुल 3984 लड़कियों के सापेक्ष 5637 लड़कों ने स्कूल छोड़ दिया। जो कुल ड्राॅप आउट का 58.59 प्रतिशत है। शिक्षा विभाग अब इन बच्चों को तलाशने के लिए सर्वे कर रहा है ताकि स्कूल छोड़ने के वास्तविक कारणों का पता लगाने के साथ इन्हें वापस शिक्षा से जोड़ा जा सके।
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बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से हर 14 साल तक के बच्चों को बुनियादी शिक्षा से जोड़ने के लिए स्कूल चलो अभियान चलाया जाता है। इसके साथ ही विभाग की ओर से पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों का भी सर्वे किया जाता है। विभागीय आंकड़ों में इस साल परिषदीय विद्यालयों में कक्षा आठ तक पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या नगर क्षेत्र में सबसे ज्यादा है। यहां 1766 विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़ दिया। फतेहाबाद में 370, बरौली अहीर में 290, पिनाहट में 251 और शमशाबाद में 108 विद्यार्थी ड्रॉपआउट हुए हैं। इन पांच ब्लाॅकों में कुल 2785 विद्यार्थियों की पढ़ाई छूटी है। एक से आठ तक के कुल 4211 विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ी, इनमें 2407 लड़के और 1804 लड़कियां शामिल हैं यानी शुरुआती कक्षाओं में ही लड़कियों की तुलना में 603 ज्यादा लड़कों का स्कूल छूट गया।

12वीं तक के 3230 लड़कों ने भी छोड़ा स्कूल

सत्र 2025-26 में कक्षा नौ से 12 तक के कुल 5410 विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ी। इनमें 3230 लड़के और 2180 लड़कियां हैं। इस स्तर पर भी लड़कों की संख्या लड़कियों से 1050 अधिक है। नगर क्षेत्र में सबसे ज्यादा 2021 विद्यार्थी ड्रॉपआउट हुए। बरौली अहीर में 636, अकोला में 363 और अछनेरा में 300 विद्यार्थियों ने पढ़ाई छोड़ दी। दोनों स्तरों के आंकड़ों को जोड़ें तो कक्षा एक से 12 तक कुल 9621 विद्यार्थियों की पढ़ाई छूटी है। इनमें 5637 लड़के और 3984 लड़कियां हैं। यानी कुल मिलाकर 1653 अधिक लड़कों ने स्कूल छोड़ा है।
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जो बच्चे दूसरे स्थानों पर चले गए हैं, उनकी जानकारी जुटाने के लिए हमारी टीम सर्वे कर रही है। उन विद्यालयों में पढ़ाई के लिए गए बच्चों का पता लगाने के लिए संबंधित विद्यालयों से समन्वय किया जा रहा है, ताकि ड्रॉपआउट बच्चों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। - डॉ. राकेश सिंह, बीएसए
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नामांकन के साथ बच्चों को स्कूल में रोकना भी जरूरी

बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए सरकार की ओर से विभिन्न योजनाएं चलाई जाती हैं, लेकिन पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या बुनियादी शिक्षा के लिए चिंता का विषय है। स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान कर उनके ड्रॉपआउट होने की वजह पता लगाई जाए और उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने के प्रयास किए जाएं। - मुकेश शर्मा, कोषाध्यक्ष, माध्यमिक शैक्षिक महासंघ
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