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भविष्य में युद्ध जमीन पर नहीं, तकनीक से लड़े जाएंगे

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आगरा। आजादी के अमृत महोत्सव की कड़ी में आयोजित विज्ञान प्रसार महोत्सव (विज्ञान सर्वत्र पूज्यते) का मंगलवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसर स्थित जेपी सभागार में शुभारंभ हुआ। एडीआरडीई के निदेशक डॉ. एके सक्सेना ने अपने संबोधन में कहा कि सैन्य क्षेत्र में विज्ञान और तकनीक के कारण व्यापक बदलाव आया है। भविष्य में युद्ध जमीन पर नहीं बल्कि तकनीक से लड़े जाएंगे।
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डॉ. एके सक्सेना ने कहा कि हर क्षेत्र को तकनीक से जोड़कर ही आगे बढ़ा जा सकता है। कभी भारत को सपेरों का देश कहा जाता था। लेकिन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की ओर से बनाई गई अग्नि मिसाइल का लोहा विश्व ने माना। भारत को नई शक्ति के रूप में स्वीकार करना शुरू किया। गगन यान के बाद देश स्टार्टअप की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। युवाओं को शोध और नवाचार पर ध्यान देना चाहिए। जिससे वह शिक्षा के माध्यम से देश के विकास में अपना योगदान दे सकें।
आयोजन सचिव व डीन अकादमिक प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार और संस्कृति मंत्रालय के नेतृत्व में विज्ञान प्रसार की ओर से महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन सहित 12 विभाग और मंत्रालय भागीदार हैं। महोत्सव 28 फरवरी तक चलेगा। संचालन पूजा सक्सेना ने किया ।
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जालमा संस्थान के निदेशक डॉ. अब्दुल मोहम्मद खान ने कहा कि देश में चिकित्सा क्षेत्र में व्यापक बदलाव आया है। कोरोना महामारी पर सीमित संसाधन और जानकारी से भी प्रभावी अंकुश लगाया गया। यहां वैक्सीन बना कर अन्य देशों को भी उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि हमारे देश में साधन संपन्न प्रयोगशालाएं हैं। इनमें होने वाले शोध कार्य को महज डिग्री तक सीमित न रखा जाए बल्कि देश के विकास में इस्तेमाल किया जाए। हमें शोध और तकनीक का दायरा बढ़ाना होगा। शिक्षा, चिकित्सा, कृषि, अनुसंधान आदि क्षेत्रों को तकनीक से जोड़ना होगा।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने की। उन्होंने कहा कि नई तकनीक में मानव और मशीन एक हो रहे हैं। आज चीन और अमेरिका तकनीकी दृष्टि से हमसे बहुत आगे हैं। आज का युग ओयो, फ्लिपकार्ट, अमेजन, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन का है। हमारे पास कोई बड़ी तकनीकी उपलब्धि नहीं है। युवाओं को विज्ञान से सीख कर अपने समाज और देश की प्रगति के लिए योगदान देना चाहिए। तभी इस प्रकार के आयोजनों की सार्थकता सिद्ध होगी। विज्ञान और प्रौद्योगिकी की दृष्टि से भारत का एक स्वर्णिम इतिहास रहा है। कार्यक्रम में पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के पूर्व कुलपति प्रो. सुंदर लाल, डीन रिसर्च प्रो. विनीता सिंह, जनसंपर्क अधिकारी प्रो. प्रदीप श्रीधर, प्रो. वीके सारस्वत, प्रो. बीएस शर्मा, डॉ. एसके जैन, डॉ. धीरेंद्र कुमार, डॉ. आरके अग्निहोत्री, डॉ. रामवीर सिंह आदि उपस्थित रहे।
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