दो दिन पहले हुए थे लापता
जीआरपी को परिजनों ने बताया कि चालक संजय की नौकरी कोरोना काल में लगे लॉकडाउन में चली गई थी। उसका एक पांच साल का बेटा है। नौकरी नहीं होने की वजह से संजय का घर चलाना मुश्किल हो रहा था। दंपती के बीच भी झगड़े होने लगे थे। 14 जून को संजय की मां उर्मिला देवी से भी कहासुनी हो गई थी। इसके बाद पति-पत्नी घर छोड़कर चले आए। बेटे को भाई दीपक के पास छोड़ दिया था। इस पर परिजनों ने दोनों की तलाश शुरू कर दी। मगर, वो कहीं पर नहीं मिले।
जान देने से पहले नौकरी मांगने भी गया
जीआरपी निरीक्षक ने संजय की जेब की तलाशी ली तो उसकी जेब से एक मोबाइल नंबर निकला, जोकि आगरा के ही ट्रांसपोर्टर बिरजू का था। जीआरपी ने बिरजू से फोन पर बात की। उन्हें संजय का हुलिया बताया तो ट्रांसपोर्टर पहचान गया। इस पर ट्रांसपोर्टर ने बताया कि 15 जून को संजय उनके पास ट्रक चालक की नौकरी के लिए आया था। मगर, अभी उनके पास कोई नौकरी नहीं थी। इसलिए उससे मना कर दिया था। उसे नंबर दे दिया था। उससे कहा था कि कोई जरूरत पड़ेगी तो वह उसे कॉल करके बुला लेगा।
संजय के पास नहीं था मोबाइल
जीआरपी ने बताया कि संजय और प्रीति के पास कोई मोबाइल फोन नहीं रहता था। मौके से यदि ट्रांसपोर्टर का पता लिखी पर्ची नहीं मिलती तो संजय की शिनाख्त में भी बहुत समय लग जाता।
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