फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे ट्रैक पर आत्महत्या: लॉकडाउन में छूटी नौकरी, आर्थिक तंगी से परेशान ट्रक चालक ने पत्नी संग दी जान

Fri, 18 Jun 2021 12:07 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा-मथुरा

सार

बुधवार सुबह तकरीबन नौ बजे बिल्लोचपुरा रेलवे स्टेशन के पास से गुजर रहे लोगों ने युवक और युवती के शव पड़े देखे। यह शव खंभा संख्या 1359 के निकट पड़े थे। 
विज्ञापन
रेल ट्रैक पर की थी दंपती ने आत्महत्या - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आगरा में सिकंदरा के मोहम्मद पुर निवासी ट्रक चालक संजय ने पत्नी प्रीति के संग ट्रेन से कटकर जान दे दी। बुधवार सुबह दंपती के शव बिल्लोचपुरा रेलवे स्टेशन के पास रेलवे लाइन पर पड़े मिले। मथुरा जीआरपी ने शवों का पोस्टमार्टम कराया। संजय की जेब से मिले एक नंबर से दोनों की शिनाख्त हुई। परिजनों ने जीआरपी को बताया कि संजय की लॉक डाउन में ट्रांसपोर्ट कंपनी से नौकरी छूट गई थी। इससे वह आर्थिक संकट से जूझ रहा था। दो दिन पहले बेटे को भाई के पास छोड़कर पति-पत्नी निकल गए। इसके बाद नौकरी की तलाश कर रहे थे। नौकरी नहीं लगने पर ही उन्होंने यह कदम उठाया है। 
विज्ञापन


बुधवार सुबह तकरीबन नौ बजे बिल्लोचपुरा रेलवे स्टेशन के पास से गुजर रहे लोगों ने युवक और युवती के शव पड़े देखे। यह शव खंभा संख्या 1359 के निकट पड़े थे। स्टेशन मास्टर की सूचना पर जीआरपी मथुरा निरीक्षक सुबोध कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। आसपास के लोग पहचान नहीं कर सके। इस पर शवों को जीआरपी मथुरा अपने साथ ले गई। जेब से मिले मोबाइल नंबर के आधार पर मृतक की शिनाख्त मोहम्मदपुर, सिंकदरा निवासी संजय पुत्र गोपाल और उसकी पत्नी प्रीति के रूप में हुई।

घटना की जानकारी पर परिजन भी पहुंच गए। वह मथुरा आए। जीआरपी निरीक्षक ने बताया कि दोनों के शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजन को सौंप दिए हैं। परिजनों से पूछताछ में पता चला है कि पेशे से ट्रक चालक संजय को नौकरी की तलाश थी। इस कारण वो परेशान चल रहा था। घर में आर्थिक तंगी हो गई थी। नौकरी नहीं मिलने पर पत्नी के साथ ट्रेन से कटकर जान दे दी।
विज्ञापन

 
विज्ञापन

दो दिन पहले हुए थे लापता
जीआरपी को परिजनों ने बताया कि चालक संजय की नौकरी कोरोना काल में लगे लॉकडाउन में चली गई थी। उसका एक पांच साल का बेटा है। नौकरी नहीं होने की वजह से संजय का घर चलाना मुश्किल हो रहा था। दंपती के बीच भी झगड़े होने लगे थे। 14 जून को संजय की मां उर्मिला देवी से भी कहासुनी हो गई थी। इसके बाद पति-पत्नी घर छोड़कर चले आए। बेटे को भाई दीपक के पास छोड़ दिया था। इस पर परिजनों ने दोनों की तलाश शुरू कर दी। मगर, वो कहीं पर नहीं मिले। 
 
जान देने से पहले नौकरी मांगने भी गया
जीआरपी निरीक्षक ने संजय की जेब की तलाशी ली तो उसकी जेब से एक मोबाइल नंबर निकला, जोकि आगरा के ही ट्रांसपोर्टर बिरजू का था। जीआरपी ने बिरजू से फोन पर बात की। उन्हें संजय का हुलिया बताया तो ट्रांसपोर्टर पहचान गया। इस पर ट्रांसपोर्टर ने बताया कि 15 जून को संजय उनके पास ट्रक चालक की नौकरी के लिए आया था। मगर, अभी उनके पास कोई नौकरी नहीं थी। इसलिए उससे मना कर दिया था। उसे नंबर दे दिया था। उससे कहा था कि कोई जरूरत पड़ेगी तो वह उसे कॉल करके बुला लेगा।

संजय के पास नहीं था मोबाइल 
जीआरपी ने बताया कि संजय और प्रीति के पास कोई मोबाइल फोन नहीं रहता था। मौके से यदि ट्रांसपोर्टर का पता लिखी पर्ची नहीं मिलती तो संजय की शिनाख्त में भी बहुत समय लग जाता।

एटा: कोतवाली से 1361 कारतूस 'गायब', एसएसपी ने हैड मुहर्रिर के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें