बरसाना, नंदगांव, मथुरा और वृंदावन के बाद ब्रज की अलौकिक होली का उल्लास गोकुल की कुंज गलियों तक पहुंच गया है। सोमवार को यहां कान्हा गोपियों के साथ छड़ीमार होली खेलेंगे। इसके लिए गोकुल भव्य रूप से सजाया गया है।
होली के डोला के साथ यमुना किनारे छड़ीमार होली का आयोजन होगा। मुरलीधर घाट पर भी विषेष व्यवस्था की गई है। गोकुल के प्रवेश द्वारों को भव्य रूप से सजाया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है।
लठमार होली की तरह छड़ीमार होली की परंपरा भी सदियों से चली आ रही है। मथुरा कारागार में जन्म लेने के बाद कान्हा यमुनापार कर नंदबाबा के गांव गोकुल आ गये थे। भगवान श्रीकृष्ण का बचपन यहीं बीता और बाल लीलाएं कीं।