पुलिस की पूछताछ में रजत ने बताया कि वह 12वीं पास है। वह जल्दी अमीर बनना चाहता था। बैंक मैनेजर और कर्मियों से पंच सितारा होटल में मिलता। बाउंसर रखता था। लोन की रकम से अपने शौक पूरे करता था। जब पकड़ा गया तो वह छह लाख की घड़ी, दस हजार का पेन, महंगे जूते, कपड़े आदि पहने हुए था।
56 कार लोन, खरीदी एक ही
पुलिस ने बताया कि आरोपी रजत ने संजय प्लेस के पास एस्सार एंटरप्राइजेज के नाम से हैंडीक्राफ्ट का काम किया। मयंक अग्रवाल निवासी कमला नगर एकाउंटेंट था। मयंक ने बैंक अधिकारियों से रजत का परिचय कराया। उसने कार लोन की प्रक्रिया को जान लिया। दोस्त मोहित जैन निवासी शाहगंज भी शामिल हुआ। रजत ने नोएडा में जेआर आटोमोटिव के नाम से कंपनी बनाई।
वेबसाइट पर कंपनी का ब्योरा दिया। सर्विस रोड पर एक आफिस खोला। इसमें कर्मचारी रखे गए। कर्मचारियों से दस्तावेज लेकर लोन लिया। नोटबंदी के बाद किस्त नहीं मिलने पर बैंकों ने नोटिस भेजे। वह कर्मचारियों के पास आए। इस पर उन्हें धोखाधड़ी का पता चला। कंपनी की फर्जी कुटेशन लगाता था। फर्जी आरसी, पे स्लिप भी जमा कराई। मेल से सवाल करने पर बैंकों को जवाब भी दिया जाता था। वर्ष 2013 से 2016 तक 56 से अधिक कारों पर फर्जी तरीके से लोन कराकर आठ करोड़ से अधिक की आर्थिक क्षति बैंकों को पहुंचाई।