मैनपुरी। जिले के गांव पड़ोरा हथपऊ में जन्मे ओमशरण आर्य चंचल नौकरी से सेवानिवृत होने के बाद भी हिंदी को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। हिंदी साहित्य में रुचि रखने वाले ओमशरण ने कई मंचों से काव्य पाठ करके हिंदी का मान बढ़ाया है। उनकी रचना-खड़ी हो रही है हिंदी अब हिम्मत सीना तान, नत मस्तक होने लगे बड़े-बड़े तूफान, से उनको काव्य मंचों पर पहचान मिली है।
पड़ोरा हथपऊ में स्वतंत्रता सेनानी नत्थू सिंह के घर 26 फरवरी 1958 को जन्मे ओमशरण आर्य चंचल ने हिंदी और संस्कृत से एमए किया। आदर्श राजकीय इंटर कॉलेज मनिला अल्मोड़ा से सेवानिवृत होने के बाद वह घर पर ही बच्चों को हिंदी साहित्य का ज्ञान दे रहे हैं। हिंदी साहित्य को बढ़ावा देने के लिए लोगों के बीच जागरूकता अभियान चला रहे हैं। उनका मानना है कि अंग्रेजी का ज्ञान बुरी बात नहीं है लेकिन हिंदी साहित्य का ज्ञान भी जरूरी है। आज के बच्चों को हिंदी वर्णमाला तक पता नहीं है। वह आकाशवाणी आगरा से भी काव्य पाठ कर चुके हैं।
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यह रचनाएं हो चुकीं प्रकाशित
रचनाएं दीप जलाओ, मुक्तक संग्रह, बाल दोहा शतक, नई रोशनी, सुनो कहानी, ऊंची भरो उड़ान, अच्छे बच्चे प्रकाशित हो चुकी हैं। दोहा शतक चंचल अठसई का प्रकाशन शेष है।
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ओम शरण आर्य चंचल को हिंदी सेवा के लिए कई मंचों से साहित्य श्री, हिंदी कवि रत्न, साहित्य सेवा सम्मान, काव्य मर्मज्ञ सम्मान, देवभूमि साहित्य रत्न, सृजन श्री सम्मान, महिमा साहित्य सम्मान, सदभावना साहित्य सम्मान, काव्य कुमुद सम्मान, साहित्य साधक सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।