फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंदी हैं हम: हिंदी साहित्य के ‘द ग्रेट शो मैन’ थे राजेंद्र यादव, ताजनगरी में हुआ था जन्म

Tue, 07 Sep 2021 11:36 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

आगरा के जन्मे राजेंद्र यादव हिंदी के जाने-माने साहित्यकार हैं। उन्होंने 66 वर्षों तक लेखन किया। वह 27 वर्ष तक पत्रिका हंस के संपादक रहे। 
विज्ञापन
हिंदी हैं हम: साहित्यकार राजेंद्र यादव - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

साल 2003-04 में हिंदी साहित्य का सर्वोच्च सम्मान शलाका मिलने की घोषणा के बाद ‘द ग्रेट शो मैन’ के नाम से मशहूर साहित्यकार राजेंद्र यादव से मिलने कुछ दोस्त उनके घर पहुंचे। उन्होंने पहले ही शर्त रख दी थी कि अगर घर आना है तो सिगरेट का एक पैकेट लेकर आना। हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें सिगरेट पीने से मना किया था लेकिन राजेंद्र यादव के विराट व्यक्तित्व के आगे डॉक्टरी राय कहां टिक पाती थी। उन्होंने 27 वर्ष तक पत्रिका हंस का संपादन किया और 66 वर्षों तक लेखन का कार्य करते रहे। 

विज्ञापन


राजेंद्र यादव का जन्म 28 अगस्त 1929 को ताजनगरी में हुआ था। साल 1951 में आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य से एमए की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उनका विवाह सुपरिचित हिंदी लेखिका मन्नू भंडारी के साथ हुआ था। 

उन्होंने साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद्र द्वारा 1930 में स्थापित की गई पत्रिका हंस का मुंशी जी की जयंती के दिन 31 जुलाई 1986 को पुन:प्रकाशन शुरू किया। यह पत्रिका वर्ष 1953 में बंद हो गई थी। राजेंद्र यादव ने जीवन के आखिरी क्षणों तक (27 वर्ष) पत्रिका का संपादन किया। 84 वर्ष की आयु में 28 अक्तूबर 2013 की रात दिल्ली में उनका निधन हो गया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

नई कहानी आंदोलन की शुरुआत
दुनिया के जाने-माने लेखक चेखोव तुर्गनेव और अल्वेयर कामो की रचनाओं का उन्होंने अनुवाद किया। साहित्यकार कमलेश्वर व मोहन राकेश के साथ उन्होंने नई कहानी आंदोलन की शुरुआत की। उनके मशहूर उपन्यास ‘सारा आकाश’ पर बासु चटर्जी ने फिल्म भी बनाई। इसके अलावा उनके कई कहानी संग्रह भी प्रकाशित हुए हैं। इनमें देवताओं की मृत्यु, खेल-खिलौने, जहां लक्ष्मी कैद है, छोटे-छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक और वहां पहुंचने की दौड़... प्रमुख हैं। 

वर्षों तक आते रहेंगे याद
कथादेश पत्रिका के संपादक हरिनारायण ने बताया कि हिंदी साहित्य सृजन में राजेंद्र यादव का नाम वर्षों तक याद रखा जाएगा। कई मंचों पर उनसे मुलाकात हुई। वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। तेर-तर्रार व्यक्तित्व और भाषा पर उनकी जबरदस्त पकड़ थी। हिंदी साहित्य को नई कहानी के नाम से रोचक विधा उन्हीं की देन है। हंस पत्रिका को पुन:स्थापित किया और आखिरी समय तक जुड़े रहे। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें