हिंदी हैं हम: साहित्यकार राजेंद्र यादव
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साल 2003-04 में हिंदी साहित्य का सर्वोच्च सम्मान शलाका मिलने की घोषणा के बाद ‘द ग्रेट शो मैन’ के नाम से मशहूर साहित्यकार राजेंद्र यादव से मिलने कुछ दोस्त उनके घर पहुंचे। उन्होंने पहले ही शर्त रख दी थी कि अगर घर आना है तो सिगरेट का एक पैकेट लेकर आना। हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें सिगरेट पीने से मना किया था लेकिन राजेंद्र यादव के विराट व्यक्तित्व के आगे डॉक्टरी राय कहां टिक पाती थी। उन्होंने 27 वर्ष तक पत्रिका हंस का संपादन किया और 66 वर्षों तक लेखन का कार्य करते रहे।
राजेंद्र यादव का जन्म 28 अगस्त 1929 को ताजनगरी में हुआ था। साल 1951 में आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य से एमए की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उनका विवाह सुपरिचित हिंदी लेखिका मन्नू भंडारी के साथ हुआ था।
उन्होंने साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद्र द्वारा 1930 में स्थापित की गई पत्रिका हंस का मुंशी जी की जयंती के दिन 31 जुलाई 1986 को पुन:प्रकाशन शुरू किया। यह पत्रिका वर्ष 1953 में बंद हो गई थी। राजेंद्र यादव ने जीवन के आखिरी क्षणों तक (27 वर्ष) पत्रिका का संपादन किया। 84 वर्ष की आयु में 28 अक्तूबर 2013 की रात दिल्ली में उनका निधन हो गया।