#हिंदीहैंहम: डॉ. अचला नागर
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अचला नागर, फिल्मी जगत का वो प्रसिद्ध नाम है, जिन्होंने ‘निकाह’ और ‘बागवान’ जैसी प्रसिद्ध फिल्मों की पटकथा लिखी है। कहानी, पटकथा और संवाद लेखन के क्षेत्र में ख्याति हासिल करने वाली अचला नागर मथुरा में बहू बनकर आई थीं।
फिल्मी दुनिया के अनेक पुरस्कार हासिल करने वाली अचला नागर का जन्म लखनऊ में साहित्यकार अमृतलाल नागर के घर हुआ था। बीएससी के बाद एमए और हिंदी साहित्य में पीएचडी हासिल कर वे बहू बनकर मथुरा आ गईं। 1982 में फिल्मी दुनिया में प्रवेश करते हुए फिल्म ‘निकाह’ की पटकथा लिखी। यह फिल्म बहुत प्रसिद्ध हुई, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ संवाद का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला। मानवीय दृष्टि को लेकर महिलाओं पर लिखी गई उनकी कहानी, पटकथाओं पर आधारित अधिकांश फिल्मों ने ख्याति बटोरी। इसमें नगीना और बागवान बहुचर्चित हुईं हैं। इनके अलावा फिल्म ‘आखिर क्यों’ एक स्त्री की सशक्त अभिव्यक्ति देने वाली फिल्म साबित हुई। फिल्म बाबुल की पटकथा डॉ. नागर ने ही लिखी थी। ईश्वर, मेरा पति सिर्फ मेरा है, निगाहें, नगीना, सदा सुहागन आदि उनकी अन्य चर्चित फिल्में हैं। अचला शुरूआती दौर में मथुरा-वृंदावन आकाशवाणी से भी जुड़ी रही हैं।
अनेक पुरस्कार प्राप्त किए
2003 में हिंदी संस्थान उत्तर प्रदेश द्वारा डॉ. अचला नागर को ‘साहित्य भूषण पुरस्कार और 1987 में यशपाल अनुशंसा पुरस्कार दिया गया। हिंदी उर्दू साहित्य एवार्ड कमेटी सम्मान तथा ‘साहित्य शिरोमणि सम्मान पुरस्कार से उन्हें नवाजा गया। महाराष्ट्र राज्य हिंदी अकादमी ने डॉ. नागर को ‘सुब्रमण्यम भारती हिंदी सेतु विशिष्ट सेवा पुरस्कार 2010-2011 तथा फिल्म बाबुल के लिए उन्हें दादा साहेब फाल्के अकादमी सम्मान भी मिला है।
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