गुलाब राय की प्रतिमा और उनके प्रपोत्र संजय राय
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दिल्ली गेट पर स्थापित है प्रतिमा
दिल्ली गेट चौराहे पर बाबू गुलाब राय की प्रतिमा स्थापित है। नगर निगम की ओर से स्थापित प्रतिमा से पूर्व भी इस सड़क को बाबू गुलाब राय मार्ग के नाम से जाना जाता था। दिल्ली गेट में उनका निवास भी रहा। आज भी वहां उनके परिवारीजन रहते हैं।
तमाम यादें संजो कर रखी हैं (फोटो)
बाबूजी की तमाम यादें हमने संजो कर रखी हैं। वह एक आदर्श पुरुष थे। सार्वजनिक जीवन जीने में विश्वास रखते थे। गरीबों और शोषितों की सहायता को सदैव तत्पर रहते थे। उनके लेखों से मानवतावादी विचारधारा पल्लवित होती है। उन्होंने सदैव सत्य का साथ दिया। बाबूजी साइकिल भी बहुत तेज चलाते थे। मीलों लंबा सफर एक ही दिन में तय कर लेते। उनकी लेखन क्षमता भी अलग थी। परिवार के बुजुर्ग बताते हैं कि एक बार जिस निबंध को लिखने बैठते थे, पूरा करके ही उठते थे। -संजय राय, प्रपौत्र
बहुआयामी निबंधकार थे बाबूजी
हिंदी के सच्चे सेवक बाबू गुलाब राय उत्कृष्ट श्रेणी के निबंधकार थे। उनका निबंध लेखन बहुआयामी था। प्रबंध प्रभाकर, निबंध रत्नाकर, निबंध माला, जीवन रश्मियां, मेरे निबंध, कुछ उथले-कुछ गहरे शीर्षकों के साथ उनके तमाम निबंध संग्रह प्रकाशित हुए। वह शांत स्वभाव के थे। मृदु और अल्पभाषी थे। सभी से आदरभाव के साथ बात करते थे। पहले दूसरे की बात सुनते थे फिर जरूरी होने पर ही अपना मत देते थे।
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