मलेरिया: सर्दी के साथ तेज बुखार आता है। मरीज को लगातार बुखार नहीं रहता। 24 से 36 घंटे बाद पसीना आकर फिर से दोबारा बुखार आ जाता है। उल्टी होती है और मरीज का जी मिचलाता है। कमजोरी और शरीर में ऐंठन रहती है।
डेंगू: तेज बुखार आता है। सिर में दर्द रहता है। शरीर पर लाल चकत्ते पड़ जाते हैं। मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द रहता है। गंभीर हालत में मरीज के नाक, मुंह से रक्त आने लगतो है। मरीज सदमे में भी चला जाता है। उल्टी होती हैं, भूख भी नहीं लगती है।
चिकनगुनिया: बुखार रहता है। जोड़ों में तेज दर्द उभरता है। मांसपेशियां दर्द करती हैं। थकान-कमजोरी रहती है। शरीर पर लाल दाने उभर आते हैं। ठीक होने पर भी मरीज को लंबे समय तक जोड़ों में दर्द बना रहता है।
स्क्रब टाइफस: बुखार, खांसी, सिर दर्द होता है। सांस फूलती है। उल्टी होती हैं। मांसपेशियां दर्द करती हैं। लाल चकत्ते होते हैं। चूहे, छछूंदर, गिलहरी सहित पशुओं के शरीर पर पिस्सु के काटने से यह बीमारी होती है। इनकी लार में ओरियंटा सुसुगमुसी बैक्टीरिया इसकी वजह है। सात से 10 दिन में लक्षण दिखते हैं।
लेस्टोस्पाइरोसिस: बुखार के साथ सिर में दर्द रहता है। मांसपेशियों में दर्द रहता है। पशुओं पर रहने वाले परजीवी में लेप्टोस्पाइरा इंटेरोगंस बैक्टीरिया से यह बीमारी होती है। पशुओं के मूत्र के जरिये जमीन पर पहुंचता है, खुले में शौच करने से लोग संक्रमित हो जाते हैं। 15 से 20 दिन में लक्षण दिखने लगते हैं।
कोरोना वायरस: बुखार के साथ जुकाम-खांसी रहना। छाती में जकड़न होना, सांस फूलना। गले में खराश की शिकायत। सांस लेने में परेशानी होना। सिरदर्द होना। स्वाद और गंध न आना। ऑक्सीजन का स्तर कम होते जाना।