सेंट्रल जीएसटी कमिश्नर ललन कुमार ने बताया कि आरोपी वरुण गुप्ता के घर और अन्य परिसरों से फर्जी आईटीसी के दस्तावेज, डेटा, लैपटॉप, डायरी, बिल बरामद किए गए हैं। वरुण गुप्ता ने टीम के सामने स्वीकार किया कि चारों लोग फर्जी बिल के जरिये आईटीसी वसूल रहे थे। वह इस समय 95 फर्म चला रहे थे, जो केवल कागजों पर ही बिक्री कर रही थीं। जीएसटी अधिकारी इस मामले में उनसे जुड़े अन्य लोगों को भी दबोचने में लगी हुई हैं।
गरीबों के आईकार्ड से बना ली कंपनियां
100 फर्जी कंपनियां बनाकर पूरा रैकेट चला रहे वरुण गुप्ता ने जीएसटी अधिकारियों को बताया कि वह गरीब मजदूरों के आईकार्ड और पैनकार्ड के जरिये कंपनियों को रजिस्टर्ड करा रहा था। इनमें से कई कंपनियां आगरा में पंजीकृत कराई गई थीं। जिन गरीब मजदूरों को कंपनी का डायरेक्टर, चेयरमैन कागजों पर बना रखा था, उन्हें यह पता ही नहीं था। उनके नाम से पैन कार्ड बनवाकर कंपनियों को चला रहा था।
पांच साल की कैद, जुर्माने का प्रावधान
फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट के फर्जीवाड़े में वरुण गुप्ता, ऋषभ मित्तल, विकास अग्रवाल, सुनील राठौर ने सीजीएसटी अधिनियम 2017 की धारा 132 (1) (बी) और (सी) के तहत अपराध किया है। यह संज्ञेय गैर जमानती अपराध है, जिसमें पांच साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
इस टीम ने पकड़ा फर्जी रैकेट
सेंट्रल जीएसटी कमिश्नर ललन कुमार के निर्देशन में संयुक्त आयुक्त भवन मीना, उपायुक्त पल्लव सक्सेना, सहायक आयुक्त अनिल शुक्ला, अधीक्षक ऋषि देव सिंह, संजय कुमार, सतीश कुमार, अजय सोनकर, अनुराग सोनी, नीरज पांडेय, विपिन शर्मा, कपिल कुमार आदि ने फर्जी रैकेट को पकड़ने की कार्रवाई को अंजाम दिया।
फर्जी बिल से 100 करोड़ टैक्स की हो चुकी है चोरी
सेंट्रल जीएसटी इससे पहले बीते साल जनवरी 2020 में फर्जी इनवॉइस पर 100 करोड़ की आईटीसी वसूली का पर्दाफाश कर चुका है। आगरा के आवास विकास कॉलोनी निवासी चंद्र प्रकाश कृपलानी ने 691 करोड़ रुपये की फर्जी बिक्री दिखाकर यह 100 करोड़ रुपये सरकार से आईटीसी वसूला था। इसका नेटवर्क 10 राज्यों के 23 शहरों में फैला था। उसने 120 फर्जी फर्मों से यह खेल खेला, जिसमें से 28 फर्जी फर्म आवास विकास कालोनी के पते पर पंजीकृत थीं।