न्यूनतम समान पाठ्यक्रम का 70 फीसदी पाठ्यक्रम प्रत्येक विश्वविद्यालय में लागू होगा। बाकी 30 फीसदी पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप लागू कर सकेंगे।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत राज्य विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 से ही न्यूनतम समान पाठ्यक्रम लागू किया जाना है। शासन स्तर से स्नातक के 35 विषयों व चार संकायों के पाठ्यक्रम तैयार करा लिए गए हैं। इनको वेबसाइट uphed.gov.in/page/council/en/nep-2020 पर अपलोड कर दिया गया है। अपर मुख्य सचिव, मोनिका एस. गर्ग ने पाठ्यक्रमों को लागू किए जाने के संबंध में कुलपतियों को पत्र जारी किया है।
विज्ञापन
न्यूनतम समान पाठ्यक्रम का 70 फीसदी पाठ्यक्रम प्रत्येक विश्वविद्यालय में लागू होगा। बाकी 30 फीसदी पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप लागू कर सकेंगे। न्यूनतम समान पाठ्यक्रम की संरचना में किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जाना है। पाठ्यक्रमों को फिर से संयोजित करने के लिए करीब 150 विषय विशेषज्ञों की ओर से राज्य स्तरीय समिति और राज्य संकायों की सुपरवाइजरी समितियों के साथ 200 से अधिक वर्चुअल बैठकों के माध्यम से चर्चा कर न्यूनतम समान पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।
इसे स्टेकहोल्डर्स से सुझाव प्राप्त करने के लिए राज्य उच्च शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। कुल 416 फीडबैक प्राप्त हुए, इसमें से 27 फीसदी फीडबैक को विषय विशेषज्ञों की ओर से समिति में चर्चा करने के बाद जरूरत के हिसाब से पाठ्यक्रमों में शामिल किया गया।
15 मई तक बोर्ड ऑफ स्टडीज कराने के निर्देश
न्यूनतम समान पाठ्यक्रमों को शैक्षणिक सत्र 2020-21 में लागू किए जाने के लिए विश्वविद्यालयों को 15 मई तक बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक कराने के निर्देश दिए गए हैं। जिससे नियमानुसार पाठ्यक्रमों (30 फीसदी) में जरूरी संशोधन किए जा सकें। इसकी रिपोर्ट शासन को देनी है। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव प्रो. पीके सिंह ने बताया कि शासन को विश्वविद्यालय की ओर से पत्र भेजकर अनुमति मांगी जा रही है कि कोरोना संक्रमण की स्थिति सामान्य होने पर बोर्ड ऑफ स्टडीज कराई जाएगी।
स्नातक के इन विषयों के पाठ्यक्रम निर्धारित किए गए
कला व मानविकी के 16 विषयों में एंथ्रोपोलोजी, रक्षा एवं संरचनात्मक अध्ययन, अर्थशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, ललित कला, भूगोल, इतिहास (प्राचीन), इतिहास (आधुनिक), गृह विज्ञान, विधि, दर्शनशास्त्र, शारीरिक शिक्षा, राजनीतिशास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, सामाजिक कार्य हैं। विज्ञान के नौ विषयों में- कृषि, वनस्पति विज्ञान, रसायन शास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान, भूगर्भ शास्त्र, गणित, भौतिक विज्ञान, सांख्यिकी, जंतु विज्ञान हैं। भाषा के चार विषयों में संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू का पाठ्यक्रम निर्धारित किया गया है।
अनिवार्य को-करीकुलर छह विषयों में - खाद्य पोषण एवं स्वच्छता, प्राथमिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, शारीरिक शिक्षा एवं योग, मानव मूल्य एवं पर्यावरण अध्ययन, विश्लेषणात्मक योग्यता एवं डिजिटल अवेयरनेस, संचार कौशल एवं व्यक्तित्व विकास हैं। इसके अलावा बीकॉम, बीएड, बीबीए, बीएलआईएस संकाय के विषयों के पाठ्यक्रमों को भी निर्धारित किया गया है।