वर्ष 2019 में यह गारद हटा दी गई। 31 जुलाई को स्कूल में एक परीक्षा आयोजित होने वाली है। इसके लिए एक बड़े कक्ष की जरूरत थी। इस पर स्कूल प्रबंधन की ओर से एडीएम सिटी से लैपटॉप वाला कक्ष खाली करने का आग्रह किया गया था। कहा था कि लैपटॉप दूसरे कमरे में रखवा दिए जाएं। 27 जुलाई को तहसील की टीम पहुंची थी। टीम ने चाबी से ताला खोलने के बाद लैपटॉप के बैग उठाए। वह काफी हल्के थे। उन्हें खोलकर देखा तो लैपटॉप नहीं थे। यह देखकर टीम के होश उड़ गए। जानकारी पर तहसीलदार सदर सहित अन्य अधिकारी पहुंच गए। तहसीलदार ने थाना नाई की मंडी में अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी है। एसएसपी मुनिराज जी ने बताया कि जिस कक्ष में लैपटॉप रखे थे, उसमें खाली बैग रखे मिले हैं। इस मामले में स्कूल कर्मचारियों और तहसील के कर्मचारियों से जानकारी की जाएगी। जांच के आदेश किए गए हैं।
ताला नहीं खुला तो कैसे निकल गए लैपटॉप?
इंस्टीट्यूट के कक्ष में लैपटॉप को गेट पर ताला लगाकर रखा गया था। गारद भी लगाई गई थी। हालांकि गारद दो साल पहले हट गई। इसके बावजूद किसी ने ताला नहीं खोला। तहसील की टीम को भी ताला लगा मिला था। ऐसे में यही आशंका है कि ताले की दूसरी चाबी बनाई गई। लैपटॉप को बैग से निकालकर चोरी किया गया। इसमें किसी जानकार का हाथ हो सकता है। इंस्टीट्यूट परिसर में कई कर्मचारियों के आवास हैं। इस पर पुलिस सभी से पूछताछ कर सकती है।
जॉर्ज मैसी, प्रधानाचार्य, हॉलमैन एजुकेशनल इंस्टीट्यूट का कहना है कि लैपटॉप रखने के लिए सिर्फ परिसर में कक्ष उपलब्ध कराया गया था। सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की थी। कक्ष के गेट की चाबी भी तहसील कर्मियों के पास ही थी। कक्ष को कर्मचारियों ने ही खोला है। उन्होंने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्डिंग भी बनाई है।
उठ रहे सवाल
1. गारद क्यों हटा दी गई? गारद हटी तो प्रबंधन ने प्रशासन को जानकारी क्यों नहीं दी?
2. 42 लैपटॉप एक साथ चोरी नहीं हो सकते? तो फिर उन्हें कोई एक-एक करके ले गया?
3. कक्ष के गेट का ताला तहसील के कर्मचारी के अलावा कोई और नहीं खो सकता? क्या दूसरी चाबी बनाई गई?
4. लैपटॉप रखे गए थे तो पहले से सुरक्षा पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया?
5. अगर, यह लैपटॉप विद्यार्थियों को देने से रह गए थे तो वापस क्यों नहीं किए गए?
6. क्या बीच में तहसील की टीम ने कक्ष का निरीक्षण किया था या नहीं?
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