उत्तर प्रदेश के आगरा में सेंट जोंस कॉलेज से 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त किए किए गए पुस्तकालय अध्यक्ष विजय कुमार के मामले में शासन ने उच्च शिक्षा निदेशालय से रिपोर्ट तलब कर ली है। शासन का मानना है कि नियमों के विपरीत अजय कुमार ने दो वर्ष अतिरिक्त नौकरी कर ली है। जबकि, उन्हें 60 वर्ष की आयु में ही सेवानिवृत्त होना चाहिए था।
दरअसल, पुस्तकालय अध्यक्ष विजय कुमार को 62 वर्ष की पूरी होने पर सेवानिवृत्त किए जाने के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने शासन से उनकी पेंशन के बारे में मार्गदर्शन, परामर्श मांगा था। इस पर शासन स्तर से जांच कराई गई तो पता चला कि विजय कुमार ने दो साल अतिरिक्त नौकरी कर ली है, जो नियमों के विपरीत है।
विशेष सचिव डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि 19 अक्टूबर 2012 को उच्च शिक्षा अनुभाग-दो के कार्यालय ज्ञाप में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान का पाठ्यक्रम जैसे बीलिबएससी, एमलिबएससी उपाधि के लिए अध्ययन-अध्यापन का कार्य करने वाले शिक्षकों को ही शिक्षक की श्रेणी में अनुमन्य किया गया है।
ऐसे स्थिति में जब महाविद्यालय में संबंधित पाठ्यक्रम ही संचालित नहीं थे तो अध्ययन-अध्यापन का प्रश्न ही नहीं उठता। इसलिए इन्हें शिक्षक की श्रेणी में नहीं माना जा सकता। ऐसे में विजय कुमार को दो वर्ष पूर्व ही सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए था। विशेष सचिव ने पूछा है कि विजय कुमार किस आधार पर दो वर्ष की अतिरिक्त सेवा करते रहे और दो वर्षों में उन्हें जो वेतन दिया गया है, उस संबंध में क्या कार्रवाई की जाएगी?
विशेष सचिव ने इस अनियमितता के लिए दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बारे में स्पष्ट आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने प्रदेश के सभी अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में इस तरह के लंबित प्रकरणों के बारे में भी रिपोर्ट तलब कर ली है। विशेष सचिव के पत्र से यह भी स्पष्ट हो गया है कि जिन महाविद्यालयों में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के पाठ्यक्रम संचालित नहीं हैं, वहां पुस्तकालय अध्यक्ष को 60 वर्ष पर सेवानिवृत्त किया जाएगा।