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एटा में एड्स बांट रहे स्वास्थ्यकर्मी: बच्ची का चार साल का भाई भी एचआईवी संक्रमित, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

Sun, 05 Mar 2023 11:22 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

एटा के मेडिकल कॉलेज में भर्ती बच्ची का चार साल  का भाई भी एचआईवी  संक्रमित निकला है। ये रिपोर्ट आने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। 
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एटा का मेडिकल कॉलेज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एटा में बच्ची की रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आने के बाद उसके छह वर्षीय भाई की जांच कराई गई। वह भी संक्रमित पाया गया है। बच्चों के पिता पहले से ही एचआईवी पॉजिटिव हैं। ऐसे में परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया है।
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एचआईवी पीड़ित बच्ची के पिता ने बताया कि पत्नी की चार वर्ष पूर्व कैंसर से दिल्ली में मौत हो गई थी। हम पति-पत्नी दोनों ही एचआईवी संक्रमित थे। बेटी को सर्दी सहित सांस लेने में दिक्कत हुई तो मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। यहां उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद छह वर्षीय बेटे की जांच कराई तो वह भी पॉजिटिव आया।

उसने बताया बच्ची के पॉजिटिव आने के बाद कॉलेज के स्टाफ ने शुक्रवार को उसकी छुट्टी कर दी। बोल दिया कि यहां सुविधाएं नहीं हैं, अलीगढ़ या आगरा ले जाओ। उसने बताया वह गरीब है ऐसे में बच्चों को घर लेकर चला आया। बीमार बेटी को दिक्कत हो रही है।

शिकायत के बाद दी गई दवा

शहर निवासी एक व्यक्ति द्वारा एचआईवी बच्ची के सिरिंज से इंजेक्शन लगाने के बाद दूसरे बच्चों को उसी सिरिंज से इंजेक्शन लगाने की शिकायत संपूर्ण समाधान दिवस में की गई। इसके बाद वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजनों को एआरटी सेंटर के कर्मचारियों द्वारा दवा दी गई। वहीं स्वास्थ्य अधिकारी हरकत में आए। सीएमओ सहित सीएमएस कॉलेज की महिला विंग में पहुंचे और मामले की पड़ताल की।
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चिकित्सक ने जांच कराने को लिखा

मामला तूल पकड़ता देख कॉलेज प्रशासन से बच्चों की जांच के लिए उन्हें पर्चा बनाकर दिया। जहां एचआईवी की जांच की बात तीमारदारों को पर्चें पर लिखकर दी गई।
 

तीन से छह माह में स्थिति होती है साफ

चिकित्सक चेतन चौहान ने बताया कि संक्रमित व्यक्ति को लगी सुई सहित उसके ब्लड व शारीरिक संबंध से बचाव की बात कही जाती है। सुई से अगर संक्रमण फैलने की स्थिति बनती है, तो यह संबंधित व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है। प्रतिरोधक क्षमता कम होगी तो तीन माह में रिपोर्ट में स्थिति साफ हो जाती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक है तो छह माह तक लग जाते हैं।

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ये बोले सीएमओ 

सीएमओ डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि एचआइवी संक्रमित बच्ची को इंजेक्शन लगाने वाली सिरिंज से वार्ड में भर्ती अन्य बच्चों को उसी सिरिंज से इंजेक्शन लगाने की बात कही जा रही है। प्रारंभिक जांच कर ली गई। एचआईवी संक्रमण की संभावना कम प्रतीत हो रही है। मामले की जांच की जा रही है। 

यह फोबिया टाइप है

 मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य नवनीत सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आया है कि एचआईवी संक्रमित बच्चे को जब डिस्चार्ज किया जा रहा था। उस पर वार्ड में भर्ती अन्य बच्चों के परिजनों को पता चला। यह फोबिया टाइप है। बच्चों के परिजनों को संक्रमित होने का डर लग रहा है। उनकी स्टाफ से अन्य शिकायत है। इंजेक्शन ड्रिप में डाले जा रहे थे। किसी को लगाए नहीं गए। मामले की जांच कराई जा रही है।
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