चिकित्सक ने जांच कराने को लिखा
मामला तूल पकड़ता देख कॉलेज प्रशासन से बच्चों की जांच के लिए उन्हें पर्चा बनाकर दिया। जहां एचआईवी की जांच की बात तीमारदारों को पर्चें पर लिखकर दी गई।
तीन से छह माह में स्थिति होती है साफ
चिकित्सक चेतन चौहान ने बताया कि संक्रमित व्यक्ति को लगी सुई सहित उसके ब्लड व शारीरिक संबंध से बचाव की बात कही जाती है। सुई से अगर संक्रमण फैलने की स्थिति बनती है, तो यह संबंधित व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है। प्रतिरोधक क्षमता कम होगी तो तीन माह में रिपोर्ट में स्थिति साफ हो जाती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता ठीक है तो छह माह तक लग जाते हैं।
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ये बोले सीएमओ
सीएमओ डॉ. उमेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि एचआइवी संक्रमित बच्ची को इंजेक्शन लगाने वाली सिरिंज से वार्ड में भर्ती अन्य बच्चों को उसी सिरिंज से इंजेक्शन लगाने की बात कही जा रही है। प्रारंभिक जांच कर ली गई। एचआईवी संक्रमण की संभावना कम प्रतीत हो रही है। मामले की जांच की जा रही है।
यह फोबिया टाइप है
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य नवनीत सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आया है कि एचआईवी संक्रमित बच्चे को जब डिस्चार्ज किया जा रहा था। उस पर वार्ड में भर्ती अन्य बच्चों के परिजनों को पता चला। यह फोबिया टाइप है। बच्चों के परिजनों को संक्रमित होने का डर लग रहा है। उनकी स्टाफ से अन्य शिकायत है। इंजेक्शन ड्रिप में डाले जा रहे थे। किसी को लगाए नहीं गए। मामले की जांच कराई जा रही है।