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Agra News: पीएफ घोटाले में गांधी आश्रम की संपत्ति अटैच, जानें पूरा मामला

Thu, 22 Sep 2022 09:40 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

गांधी आश्रम के 200 से ज्यादा  कर्मचारियों का पीएफ अंशदान काटा गया, पर जमा नहीं किया गया। वसूली अधिकारी के मुताबिक क्षेत्रीय भविष्य निधि कार्यालय (55/2, हरीपर्वत, संजय प्लेस, आगरा) में 15 दिनों के अंदर दस्तावेज जमाकर आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं।   

 
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विस्तार
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आगरा के क्षेत्रीय गांधी आश्रम, कमला नगर के कर्मचारियों का भविष्य निधि (पीएफ) अंशदान जमा न करने के मामले में क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त (ईपीएफओ) ने बड़ी कार्रवाई की है। आश्रम की रुनकता हाईवे स्थित 7 बीघा 16 बिस्वा जमीन को अटैच कर लिया गया है। वसूली अधिकारी संदीप कुमार ने क्षेत्रीय गांधी आश्रम, कमला नगर पर 2,31,60,307 रुपये बकाया होने के कारण संपत्ति को अटैच किया है। 
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वसूली अधिकारी के मुताबिक क्षेत्रीय भविष्य निधि कार्यालय (55/2, हरीपर्वत, संजय प्लेस, आगरा) में 15 दिनों के अंदर दस्तावेज जमाकर आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं। इसके बाद लंबित 2.31 करोड़ रुपये की वसूली के लिए कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम 1952 के अनुसार कार्यवाही की जाएगी। 


बैलेंस शीट तक ऑडिट नहीं कराई

बाईपास रोड स्थित सुल्तानगंज पुलिया पर क्षेत्रीय श्रीगांधी आश्रम, कमला नगर एक अप्रैल 1981 से संचालित है। साल 2009 में भविष्य निधि कार्यालय को पीएफ से जोड़ा गया। तब तक किसी कर्मचारी का भविष्य निधि अंशदान जमा नहीं किया गया था। आश्रम की कमेटी पीएफ के नाम पर कटौती तो करती थी, लेकिन इसे कभी जमा नहीं किया। पीएफ कार्यालय ने 2001 से आश्रम का पूरा रिकॉर्ड सीज किया और इसकी जांच की तो पता चला कि बैलेंस शीट तक ऑडिट नहीं कराई गई। 200 कर्मचारियों का भविष्य निधि मिला ही नहीं था। गांधी आश्रम की पौने तीन करोड़ रुपये की एफडी पंजाब नेशनल बैंक सूर्य नगर में थी, लेकिन इसे तुड़वा लिया गया। पीएफ ऑफिस ने इस मामले में बैंक को भी पार्टी बनाया था।

घोटाला चौबे के कार्यकाल का

पीएफ का पूरा घोटाला शंभूनाथ चौबे के कार्यकाल का है। निजी उपयोग में उन्होंने कर्मचारियों के पीएफ के पैसे का इस्तेमाल किया है। अब नुकसान आश्रम का हो रहा है। वर्ष 2020 में शंभूनाथ चौबे को इसी घोटाले के कारण हटा दिया था। उन्होंने बिल्डरों से गठजोड़ किया था।
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सचिव, क्षेत्रीय श्री गांधी आश्रम

सेवानिवृत्ति के बाद पता चला

वर्ष 2016 में पीएफ कार्यालय के पूर्व कमिश्नर विश्वजीत सागर ने कमला नगर स्थित आश्रम की जमीन पर बहुमंजिला इमारत बनाने का काम रुकवाया था। आश्रम के रिटायर हो चुके कर्मचारियों की मांग पर पीएफ की जांच की गई, पता चला कि उनका पीएफ जमा ही नहीं हुआ। जिन 200 से ज्यादा कर्मचारियों का पीएफ जमा नहीं किया, उनमें से कइयों की मृत्यु हो गई। उनके परिवार के लोग पाई-पाई को मोहताज रहे, जिसके बाद रिकवरी की यह कार्रवाई शुरू की गई। उसी के तहत यह संपत्ति अटैच की गई है।
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