फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मानवता की मिसाल: मासूम की जिंदगी बचाने के लिए दिया रक्त और गाढ़ी हो गई रघुवीर-अमित की दोस्ती

Sun, 01 Aug 2021 12:07 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

जन्म से ही खून के रिश्ते नहीं। ऐसे भी बने, जब जरूरत पर रक्त दिया और समय के साथ दोस्ती गाढ़ी हो गई। ऐसे ही दोस्ती आगरा के रघुवीर सिंह और अमित गौतम में पनपी। 
विज्ञापन
रघुवीर सिंह और अमित गौतम - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आगरा के रघुवीर सिंह और अमित गौतम की दोस्ती मानवता की मिसाल है। इसकी शुरुआत उस वक्त हुई, जब कारगिल पेट्रोल पंप के पास रहने वाले अमित गौतम के छोटे भाई अविनाश की पत्नी ने 2015 में बच्ची को जन्म दिया। उसके आंत में परेशानी थी, डॉक्टर ने ऑपरेशन की जरूरत बताई। बच्ची का बी-निगेटिव ग्रुप का ब्लड था। 

विज्ञापन


ब्लड बैंक और परिचितों से भी इस ग्रुप का रक्त नहीं मिल पाया। नवजात की लगातार हालत बिगड़ रही थी। सोशल मीडिया पर इसी ग्रुप के रक्त वाले रघुवीर सिंह का नंबर मिला। फोन पर बात हुई और रक्तदान किया। नवजात का ऑपरेशन हुआ और छह साल से दोनों में गहरी दोस्ती हो गई।

रक्त से 175 परिवारों से बना दोस्ती का नाता
समर्पण ब्लड बैंक और लोकहितम ब्लड बैंक का थैलेसीमिया के 175 बच्चों को रक्त के साथ इनके परिवार से दोस्ती का नाता हो गया है। बीते 10 साल से यह सिलसिला चल रहा है। बच्चों के परिजन तो ब्लड बैंक के पदाधिकारियों को सच्चे मित्र और हितेषी मानकर आभार जता रहे हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

परिवार के सदस्य ही बन गए
समर्पण ब्लड बैंक के निदेशक बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि 10 साल से थैलेसीमिया के 150 बच्चों को रक्त दे रहे हैं, इनके अभिभावकों से दोस्ती का रिश्ता बन गया है। अब तो परिवार के सदस्य ही बन गए हैं। 

रक्त जुटान की रहती है चिंता
लोकहिम ब्लड बैंक के निदेशक अखिलेश अग्रवाल ने कहा कि 25 बच्चों को रक्त दे रहे हैं, उनके लिए रक्त जुटाने की परिजनों से ज्यादा चिंता करते हैं। रक्त के इस रिश्ते से परिजनों से दोस्ती का नाता जुड़ गया है। 

बच्ची की जिंदगी बची, दोस्त भी बने
सिकंदरा रघुवीर सिंह ने कहा कि मेरे रक्त से नवजात की जिंदगी तो बची ही, नए दोस्त भी बन गए। बच्ची के ताऊ अमित से मेरे गहरे संबंध हैं। पांच साल से हर सुखदुख में शामिल रहते हैं। रक्त देकर कई ऐसे नए दोस्त  बन गए हैं। 

रक्त देकर बन गए अजीज
कारगिल पेट्रोल पंप के अमित गौतम ने कहा कि मेरी भतीजी छह साल की हो गई, उस वक्त हम सभी परेशान हो गए थे और आस टूटती जा रही थी। तब रघुवीर ने रक्त दिया। वह मेरे लिए अजीज हो गए हैं। दोस्ती भी समय के साथ और मजबूत हुई है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें