परिवार के सदस्य ही बन गए
समर्पण ब्लड बैंक के निदेशक बृजमोहन अग्रवाल ने बताया कि 10 साल से थैलेसीमिया के 150 बच्चों को रक्त दे रहे हैं, इनके अभिभावकों से दोस्ती का रिश्ता बन गया है। अब तो परिवार के सदस्य ही बन गए हैं।
रक्त जुटान की रहती है चिंता
लोकहिम ब्लड बैंक के निदेशक अखिलेश अग्रवाल ने कहा कि 25 बच्चों को रक्त दे रहे हैं, उनके लिए रक्त जुटाने की परिजनों से ज्यादा चिंता करते हैं। रक्त के इस रिश्ते से परिजनों से दोस्ती का नाता जुड़ गया है।
बच्ची की जिंदगी बची, दोस्त भी बने
सिकंदरा रघुवीर सिंह ने कहा कि मेरे रक्त से नवजात की जिंदगी तो बची ही, नए दोस्त भी बन गए। बच्ची के ताऊ अमित से मेरे गहरे संबंध हैं। पांच साल से हर सुखदुख में शामिल रहते हैं। रक्त देकर कई ऐसे नए दोस्त बन गए हैं।
रक्त देकर बन गए अजीज
कारगिल पेट्रोल पंप के अमित गौतम ने कहा कि मेरी भतीजी छह साल की हो गई, उस वक्त हम सभी परेशान हो गए थे और आस टूटती जा रही थी। तब रघुवीर ने रक्त दिया। वह मेरे लिए अजीज हो गए हैं। दोस्ती भी समय के साथ और मजबूत हुई है।