मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत आगरा के नौ चयनित रूट पर मई से बसें चलाने का दावा किया गया था, लेकिन चार महीने बाद भी संचालन शुरू नहीं हो सका। बसें उपलब्ध नहीं होने से ग्रामीण अब भी स्कूल, अस्पताल, बाजार और शहर तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों पर निर्भर हैं।
गांवों से शहर तक सस्ता और सुगम सफर उपलब्ध कराने की मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना चार महीने बाद भी जिले के नौ चयनित मार्गों पर धरातल पर नहीं उतर सकी है। मई से इन रूटों पर बस संचालन का दावा किया गया था। अब सितंबर बीतने को है लेकिन बसें नहीं चल सकीं।
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ऐसे में गांवों के लोगों को अब भी स्कूल, अस्पताल, बाजार और शहर तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों या सीमित सार्वजनिक परिवहन पर निर्भर रहना पड़ रहा है। योजना के तहत रजौरा-स्याहीपुरा-फतेहाबाद-आगरा, गोहरा-खेराराठौर-पिनाहट-आगरा, मलियाखेड़ा-चित्राहाट-बाह-आगरा, फतेहपुर सीकरी-कागारौल-अकोला-आगरा, मेवली-खेरागढ़-सैंया-आगरा, खेरिया-सैंया-ककुआ-आगरा, गढ़ी दर्याव-शमसाबाद-आगरा समेत नौ मार्गों का चयन किया गया था। हर विकासखंड में दो बसों के संचालन की योजना थी। योजना के अनुसार बसें अधिकतम आठ वर्ष पुरानी हो सकती हैं और डीजल, सीएनजी या इलेक्ट्रिक हो सकती हैं।
क्षेत्रीय प्रबंधक बीपी अग्रवाल ने बताया कि योजना के तहत चयनित नौ मार्गों पर बसों का संचालन प्रस्तावित था लेकिन बसें ही खरीदी नहीं जा सकीं। हालांकि बाह और फतेहाबाद रोड पर योजना के तहत बसों का संचालन हो रहा है। बाकी मार्गों पर भी बस उपलब्ध होने के बाद संचालन शुरू कराया जाएगा।