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UP: साली की सगाई भी न देख सका जीजा, समारोह के दौरान हुआ ऐसा कांड; चली गई आंखों की रोशनी

Thu, 23 Jul 2026 10:08 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के बाह क्षेत्र में 1998 में हुई फायरिंग और हत्या के प्रयास के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 साल की सजा सुनाई है। घटना में दामाद नईम की दोनों आंखों की रोशनी चली गई थी, जबकि परिवार की खुशियां मातम में बदल गई थीं।
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युवक सांकेतिक फोटो - फोटो : istock
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विस्तार
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आगरा में गोली मारकर युवक की हत्या की कोशिश और अंग-भंग करने मामले में अदालत ने थाना बाह क्षेत्र के मोहल्ला जुल्हापुरी निवासी सगे भाई सिराजउद्दीन, पप्पू अंसारी, मेहंदी हसन और मध्य प्रदेश भिंड के निवासी खलील अहमद को दोषी पाया। एडीजे-7 सुरजन सिंह ने सभी को 10-10 साल कारावास के साथ एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुना दी।
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थाना बाह में दर्ज मामले के अनुसार, मोहल्ला जुल्हापुरी निवासी रफीक ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि 18 जुलाई, 1998 की रात 10 बजे पूर्व रंजिश के कारण आरोपी सिराजउद्दीन, पप्पू अंसारी, मेहंदी हसन और खलील अहमद अन्य लोगों के साथ हथियारों से लैस होकर उनके घर आ गए। आते आरोपियों ने मारपीट शुरू कर दी। विरोध पर फायरिंग कर दी। गोली लगने से फिरोजाबाद के रामगढ़ निवासी उनका दामाद नईम, पुत्र इरशाद और पड़ोसी की पुत्री रहमत गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के दौरान पड़ोस के लोगों ने अपने-अपने मकान के दरवाजे बंद कर लिए। इसके बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देकर चले गए। घटना के अगले दिन उनकी बेटी की सगाई थी। आरोपियों ने खुशियां मातम में बदल दीं। उक्त मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से 11 गवाह अदालत में पेश किए गए।

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छर्रे लगने से चली गई आंखों की रोशनी
पीड़ित नईम ने बताया कि घटना 18 जुलाई, 1998 की है। वह अपनी साली की सगाई में आए थे। रात 10 वह अपनी ससुराल में ससुर के मकान की छत पर बैठे थे। उस दौरान आरोपी अन्य लोगों के साथ वहां आ गए। घर के दरवाजे तोड़कर गाली-गलौज देने लगे। कारण पूछने पर आरोपी बाले कि मारो ये रफीक का दामाद है। इतना बोलने पर पप्पू ने बंदूक और अन्य आरोपियों ने कट्टों से फायरिंग शुरू कर दी। गोली से निकले छर्रे उनकी उनकी दोनों आंखों में लग गए, जिससे दिखाई देना बंद हो गया। पहले एसएन इमरजेंसी में इलाज कराया। बाद में दिल्ली गांधी नेत्र चिकित्सालय, अलीगढ़ और अमृतसर इलाज कराया। डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद कहा कि जीवनभर रोशनी नहीं आ सकती।

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