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फर्जी आईडी बनाकर फइनेंस पर खरीदी बाइकों को केंटीन की बताकर सादी में देने वालों को बेच देते थे । पुलिस ने बाइकों सहित किये चार गि

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बरहन (आगरा)। वाहन चेकिंग के दौरान फर्जी आईडी पर फाइनेंस बाइक को फर्जी आरसी बनाकर बेचने वाले गिरोह के चार सदस्यों को पुलिस ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। पुलिस ने आरोपियों से चार बाइक, चार फर्जी आरसी की कॉपी, एक डेक्सटॉप, दो प्रिंटर, एक सीपीयू बरामद किया है।
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थानाध्यक्ष बहादुर सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को एत्मादपुर रोड पर वाहन चेकिंग के दौरान एक बाइक की आरसी की जांच की गई। जांच में रजिस्ट्रेशन स्कूटी का निकला और वाहन स्वामी का नाम पता भी भिन्न था। बाइक के साथ पकड़े गए दुर्ग सिंह निवासी नगला सिर्जी थाना बरहन ने पुलिस को बताया कि उसने दो बाइक अपनी बेटियों की शादी में देने के लिए डॉ. जुगल किशोर निवासी पंकज कॉलोनी, कुबेरपुर चौराहा, एत्मादपुर से खरीदी थी। दूसरी बाइक उसकी बेटी की ससुराल में है। जुगल ने कैंटीन से निकाली गई बाइक बताकर उसे 50 हजार रुपये में बेच दी थी। पुलिस के कहने पर दुर्ग ने दूसरी बाइक भी थाने में मंगवा ली। जांच में उसके कागजात भी फर्जी पाए गए।
इसके बाद पुलिस ने दबिश देकर जुगल किशोर को गिरफ्तार कर लिया। वहीं दूसरा अभियुक्त विजय भाग गया। जुगल ने पुलिस को बताया कि उसके साथ विजय सिंह उर्फ पप्पू, नर सिंह उर्फ चिंटू और सतेंद्र सिंह भी काम करते हैं। पुलिस ने जुगल के घर से दो और बाइकें भी बरामद की हैं। पुलिस ने सतेंद्र और नर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। सतेंद्र और नर सिंह ने बताया कि फर्जी आईडी बनाने का काम फिरोजाबाद से कराते थे। उन्हें एक हजार रुपये में एक फर्जी आईडी के देने पड़ते थे। पुलिस ने विनायक ऑफसेट प्रिंटर के मालिक राहुल गोयल निवासी 72 चौबेजी का बाग, थाना उत्तर फीरोजाबाद को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस ने चारों आरोपियों को जेल भेज दिया है। चेकिंग के दौरान उप निरीक्षक योगेंद्र कुमार, अमित कुमार, हेट कांस्टेबिल सुनील कुमार और आदेश त्रिपाठी, योगेंद्र कुमार, ग्रीश गौतम, कपिल कुमार, पवन कुमार, धर्मवीर, सर्विलांस टीम प्रभारी निरीक्षक नरेंद्र सिंह शामिल थे।
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छह माह में कागजात देने की बात कहकर बेच देते थे बाइक
जुगल किशोर ने बताया कि वह लोगों को कैंटीन से सस्ते दामों में बाइक दिलवाने का लालच देकर बाइक बेच देते थे। बाइक खरीदने वालों को छह माह में कागजात तैयार कराकर देने का भरोसा दिया जाता था। इसके बाद फर्जी आईडी लगाकर फाइनेंस पर बाइक खरीदी जाती थी। उसकी एक दो किस्त जमा करने के बाद फर्जी आरसी तैयार कराकर ग्राहक को उसकी छाया प्रति दे देते थे।
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