आगरा में फर्जीवाड़ा करने वालों ने हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (एचएसआरपी) में ही सेंध लगा दी। फर्जी एचएसआरपी नंबर प्लेट तैयार करने का खुलासा परिवहन आयुक्त की तरफ से किया गया, तो आरटीओ के प्रवर्तन दल अधिकारियों की नींद टूटी है। अब फर्जी नंबर प्लेट बनाने वालों की तलाश करने का दावा किया जा रहा है।
आगरा में फर्जी एचएसआरपी बन रही हैं और वाहनों पर लगाई जा रहीं हैं। आरटीओ (प्रवर्तन) कपिल देव सिंह ने बताया कि फर्जी नंबर प्लेट की जांच शुरू कर दी गई है। एआरटीओ और पीटीओ की टीम लगाई गई है। अभी तक कुछ वाहनों पर दूसरे नंबर की प्लेट लगे होने के मामले सामने आए थे लेकिन एचएसआरपी को लेकर नहीं।
अनपढ़ लोगों को शिकार बना रहा गिरोह
फर्जी नंबर प्लेट बनाने वाला गिरोह अनपढ़ लोगों को शिकार बना रहा है। ऐसा आरटीओ अधिकारियों का मानना है। इसी बात का फायदा फर्जी नंबर प्लेट बनाने वाले उठा रहे है। वह प्लेट की फीस के साथ 100 से 150 रुपये अधिक लेते है। बिना ऑनलाइन आवेदन कर नंबर प्लेट बना देते है। इसी दिशा में आरटीओ की टीम जांच करने की रणनीति तैयार कर रही है।
आरटीओ के बाहर चल रहीं दुकानें
संभागीय परिवहन विभाग के बाहर एक दर्जन से अधिक जन सुविधा केंद्र खुले हुए हैं। आरटीओ से जुड़े हर काम का इन केंद्रों पर ठेका लिया जाता है। प्रमुख सचिव परिवहन के सामने यह मामला उठा था। उन्होंने जिलाधिकारी को कार्रवाई का निर्देश भी दिया। उसके बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
965 फर्जी वाहन बीमा किए गए थे ब्लैक लिस्ट
आरटीओ में फर्जीवाड़े का खेल लंबे समय से चल रहा है। एक साल पहले वाहनों के फर्जी बीमा होने का मामला सामने आया था। बंगलूरू की एक कंपनी के नाम से यह वाहन बीमे हुए थे। कई वाहन स्वामी बीमा लेकर आरटीओ पहुंचे थे, तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। इस पर करीब 965 वाहन बीमा आरटीओ में ब्लैक लिस्ट कर दिए गए थे।
फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस भी बने
संभागीय परिवहन विभाग में वर्ष 2008-09 में सैकड़ों की संख्या में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस भी बनाए गए। इनका खुलासा लाइसेंस के ऑनलाइन होने पर हुआ। अभी भी कई लाइसेंस का रिकॉर्ड विभाग के रजिस्टर में नहीं मिलता है क्योंकि उनकी फीस जमा नहीं हुई थी। दो साल पहले 7 फर्जी हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जा रहे थे। तत्कालीन एआरटीओ एके सिंह ने मामले को पकड़ लिया था। इस मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है क्योंकि विभाग के अधिकारी फंस रहे थे।