14 अगस्त को उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी। जांच रिपोर्ट में साबित हो गया कि सहकारी बैंक की करहल शाखा में 16 लाख रुपये का गबन किया गया था। ये धनराशि ग्राहकों के खाते से निकालकर एक खाते में डाली गई और फिर उसका आहरण कर लिया गया। जांच अधिकारी इसके लिए बैंक में कैशियर के पद पर तैनात मोहम्मद आमिर को दोषी पाया। जांच रिपोर्ट आने के बाद बैंक में खलबली मच गई है।
दरअसल मई में घोटाले की बात सामने आने के बाद से ही बैंक प्रशासन मामले को दबाने में जुटा हुआ था। अधिकारी कुछ भी बताने के लिए तैयार नहीं थे। मामले की विस्तृत जांच के लिए अपर जिला सहकारी अधिकारी करहल को नामित किया गया है। वे इसकी विस्तृत जांच करेंगे।
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बैंक में प्रतिनियुक्ति पर तैनात था घोटालेबाज आमिर
घोटाले को अंजाम देने वाला कैशियर आमिर जिला सहकारी बैंक का कर्मचारी नहीं है। वह प्रादेशिक कॉपरेटिव यूनियन (पीसीयू) का सुपरवाइजर है। जिला सहकारी बैंक में वह प्रतिनियुक्ति पर तैनात था। इसी के चलते उसने बड़ी सफाई से पूरे घोटाले को अंजाम दिया। जिला सहकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी भी बजाए मामले को सामने लाने के उसे दबाने में जुटे हुए थे।
पहले से ही निलंबित चल रहा है दोषी कर्मचारी
सहकारी बैंक की करहल शाखा में घोटाले को अंजाम देने वाला कैशियर मोहम्मद आमिर नियमों के उल्लंघन और गड़बड़ियां करने का आदी है। यही कारण है कि वह बीते लगभग नौ माह से निलंबित चल रहा है। बरनाहल में तैनाती के दौरान दायित्वों के पालन में बरती गई लापरवाही के लिए निलंबित किया गया था। इसके बाद से ही वह निलंबित है। जल्द ही उस पर एफआईआर भी दर्ज कराई जा सकती है।
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