कासगंज। बैराजों से पानी का दबाव कम होने के बाद भले ही गंगानदी के जलस्तर में कमी है आई है, लेकिन पानी का प्रवाह तेज है। इससे पटियाली क्षेत्र के निचले इलाकों के खादर के खेतों में पानी पहुंच गया है। तमाम किसानों की फसलें जलमग्न हो गईं हैं। इससे किसान चिंतित हैं कि उनकी फसलें गंगा के पानी की निकासी न होने से बरबाद हो जाएंगी। अब कछला पुल पर गंगा नदी का जलस्तर घट कर 163.10 ही रह गया है।
कछला गंगानदी के जलस्तर पर सिंचाई विभाग नजर बनाए हुए है। पिछले दिनों बैराजों से काफी पानी छोड़ा गया था। इससे गंगानदी के जलस्तर में करीब डेढ़ मीटर की वृद्धि हो गई थी। अब धीमे-धीमे बैराजों से पानी का दबाव कम हुआ तो जलस्तर भी कम हो गया है। लेकिन पानी का बहाव अब भी तेज है। इस कारण गंगा की धार तेजी के साथ फैलती जा रही है।
पटियाली क्षेत्र के कादरगंज खाम ग्राम पंचायत के गांव ओमनगरिया, नगला तिलक सहित कई गांव के पास खादर के खेतों में गंगानदी का पानी घुस गया है। तीन दिन पहले कुछ खेतों में घुसा गंगा का पानी अब निकल नहीं पा रहा है। इससे फसलें बरबादी के कगार पर पहुंच गई हैं। किसान पूरी तरह चिंतित हैं।
उन्हें फसलों की चिंता सता रही है। किसानों का कहना है कि यदि गंगा में पानी की और बढ़ोत्तरी हुई तो यह पानी गांव की आबादी तक जा पहुंचेगा। इससे बाढ़ के हालात बन जाएंगे। किसानों ने प्रभावित होने वाली फसलों के मुआवजे की मांग की है।
कटान का खतरा बरकरार
पानी की रफ्तार तेज होने के कारण पटियाली क्षेत्र में कटान का खतरा बरकरार है। मेहोला बांध पर एसडीएम के निर्देश पर राजस्व टीम निरंतर निगरानी कर रही है। इस बांध पर कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग ने काम करा दिया है। जिले की सीमा में अन्य 5 बांधों की कड़ी निगरानी में सिंचाई विभाग और राजस्व टीमें लगी हैं।
पानी का लेखा-जोखा
- 44358 क्यूसेक पानी हरिद्वार बैराज से छोड़ा गया।
- 36316 क्यूसेक पानी बिजनौर बैराज से छोड़ा गया।
- 55982 क्यूसेक पानी नरौरा बैराज से छोड़ा गया।
कछलापुल पर जलस्तर-
- 163.10 मीटर शुक्रवार को कछला पुल पर रहा जलस्तर।
- 163.25 मीटर बृहस्पतिवार को था कछला पुल पर जलस्तर।
- 25 सेंटीमीटर तक 24 घंटे में घटा कछला गंगानदी में पानी।
किसानों की बात-
- धान की 14 बीघा फसल खेत में खड़ी है। वैसे तो इस फसल को पानी की जरूरत होती है, लेकिन अधिक पानी भी नुकसानदायक है। खेत में पानी ठहर जाने से फसल प्रभावित हो रही है- शिवशंकर, ओमनगरिया।
- 25 बीघा खेत में धान, मक्का, बाजरा और शकरकंद की फसल की है। चारों ही फसलें खेत में पानी भर जाने के कारण बरबाद होने के कगार पर हैं। चिंताएं बढ़ रही हैं- भूरे, नगला तिलक।
- खादर के कुछ खेतों में पानी पहुंच गया है।अभी बाढ़ के कोई हालत नही है, बैराजों से पानी का दबाव कम होने के कारण जलस्तर कम है। राजस्व टीमों को भेजकर जलस्तर की प्रतिदिन निगरानी करा रहे हैं। - शिवकुमार, एसडीएम, पटियाली।