फिरोजाबाद में कांच-चूड़ी इकाइयों में काम करने वाले 20 हजार से ज्यादा श्रमिकों ने शुक्रवार (10 जून) को सामूहिक अवकाश मांगा। ऐसा कारखानेदारों का कहना है। यह जानकारी श्रमिकों ने जगइया और मैनेजरों के माध्यम से दी है। इससे कांच चूड़ी इकाइयों में 10 जून को उत्पादन का पहिया थमने का डर उद्यमियों को सता रहा है।
यह सूचना मिलने के बाद पुलिस-प्रशासन और सतर्क हो गया है। एसएसपी ने द ग्लास सिडिंकेट और लघु उद्योग भारती के पदाधिकारियों के साथ इस संबंध में बैठक भी की। वहीं कारखानेदारों का कहना है कि उनका पूरा प्रयास है कि शुक्रवार को काम सुचारू रहे, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान न हो।
चूड़ी कारखानेदारों की मानें तो बृहस्पतिवार को उत्पन्न हालतों के बाद कारखाने में कार्यरत जगईया और मैनेजरों ने शुक्रवार को श्रमिकों काम पर नहीं आने की पुष्टि की है। जानकारों की मानें तो शुक्रवार को काम नहीं लगने के कारण चूड़ी कारखानेदारों को लाखों का नुकसान होना तय है। चूंकि करीब 100 पॉट फर्नेश और टैंक भट्ठियों में गैस सप्लाई सुचारू है। काम नहीं लगने के कारण एक कारखाने में औसतन पांच से डेढ़ से चार लाख रुपये की नेचुरल गैस बेवजह फुंक जाएगी।
ग्लास सिडिकेट से एसएसपी ने की मुलाकात
कांच कारखानेदारों के संगठन द ग्लास सिडिंकेट के पदाधिकारियों की मानें तो शुक्रवार को कारखानों में श्रमिकों द्वारा सामूहिक अवकाश मांगने की सूचना प्रशासन को भी है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने द ग्लास सिंडिकेट के चैयरमेन हनुमान प्रसाद गर्ग और ललितेश जैन के अलावा लघु उद्योग भारती के हेमंत अग्रवाल चॉयस के साथ बैठक की। इसमें मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। एसएसपी संग से वार्ता के बाद कारखानेदारों ने शुक्रवार को कारखानों में काम चलाने की बात कही है।
नेचुरल गैस व अन्य नुकसान सहना पड़ेगा
द ग्लास सिडिंकेट के अध्यक्ष ललितेश जैन ने कहा कि 'हम तो कारखाने चलाने को तैयार हैं। लेकिन कारखानों में काम करने वाले जगईया और मैनेजरों ने बताया है कि मौजूदा हालातों को लेकर कांच चूड़ी श्रमिकों ने शुक्रवार को काम पर आने से मना कर दिया है। अगर कल कारखानों में काम नहीं लगा तो लाखों की नेचुरल गैस व अन्य नुकसान सहना पड़ेगा।'
कामकाज सुचारू रहे यह सभी के हित में
द ग्लास सिंडिकेट के चैयरमेन हनुमान प्रसाद गर्ग ने कहा कि 'कारखानों में कामकाज सुचारू रहे यह सभी के हित में है। जब श्रमिक काम पर नहीं आएंगे तो काम चलना मुश्किल होगा। हम श्रमिकों से संपर्क साध कर काम पर आने के लिए कह रहे हैं। अगर श्रमिक काम पर आएंगे तो कामकाज चलाने में हमें कोई दिक्कत नहीं है।'