ताजमहल के पीछे यमुना में आग धधक रही है। कूड़ा, कचरा जलाया जा रहा है। झाड़ियां तक जल रही हैं। काला धुआं सफेद ताजमहल तक उड़ रहा है। विश्वदाय स्मारक काला पड़ सकता है लेकिन, जिम्मेदार विभाग आग लगने की घटनाओं पर रोक और कार्रवाई के बजाय एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे हैं।
ताजमहल के 60 वर्ग किमी. में ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) है। मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी अध्यक्ष हैं। सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण व पर्यावरण की दृष्टि से क्षेत्र संवेदनशील घोषित किया है। लेकिन अधिकारी आंखें मूंदे हुए हैं। पिछले 15 दिनों में तीसरी बार यमुना में आग की लपटें उठीं। शनिवार को भी ताजमहल के पीछे यमुना आग से धधकती रही। वायु प्रदूषण मानकों की धज्जियां उड़ने पर भी जिम्मेदार मूक-बधिर बने हुए हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यमुना नदी सूख गई है। नदी में पानी नहीं बचा। ऐसे में दिनभर जुआरियों के फड़ लगे रहते हैं। रिवर पुलिस निगरानी नहीं करती। यमुना किनारा से गुजरने वाले पर्यटक ताजमहल की तरफ उड़ते काले धुएं के फोटो व वीडियो बनाते हैं।
जिम्मेदारों की दलील - सिंचाई विभाग की है नदी
अपर नगरायुक्त सुरेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि नदी सिंचाई विभाग का अधिकार क्षेत्र है। नगरायुक्त ने पत्र लिखा था। फोन भी किया था। आग लगने की घटनाएं रोकना सिंचाई विभाग का काम है।
हमारा काम बाढ़ नियंत्रण
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता केपी सिंह ने बताया कि सिंचाई विभाग का काम सिर्फ नदी में बाढ़ नियंत्रण है। अग्निकांड की घटनाएं रोकना नगर निगम, राजस्व विभाग और जिला पंचायत की जिम्मेदारी है।
कब-कब लगी आग
- 27 अप्रैल को हाथी घाट के पास यमुना नदी की तलहटी में आग से पांच हेक्टेयर क्षेत्र में पेड़-पौधे राख हो गए।
- 28 अप्रैल को राजकीय उद्यान के पीछे यमुना नदी में आग लगने के वीडियो पर्यटकों ने बनाए थे।
- 11 मई को फिर मंटोला नाला के पास यमुना में आग की लपटें उठती रहीं। ताजमहल तक धुआं उड़ा।
मोक्षधाम पर खराब पड़ी चिमनी
ताजमहल के बसई घाट के पास मोक्षधाम है। जहां दिनभर चिताएं जलती हैं। काला धुआं तक उड़ता है। आगरा विकास प्राधिकरण ने यहां लाखों रुपये कीमत से धुएं को पानी से सोखने वाली चिमनी लगाई थीं। जो पिछले एक साल से खराब पड़ी हैं। धुआं ताजमहल तक उड़ रहा है।