अदालत ने उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की संपूर्ण धनराशि पीड़िता को दी जाएगी। एडीजीसी सुभाष चतुर्वेदी ने बताया कि वारदात के बाद से ही अभियुक्त जेल में था। अदालत ने सजा का वारंट जेल भिजवाया है।
पीड़िता ने दिया पिता के बच्चे को जन्म
घटना के बाद जब मामला संज्ञान में आया तब तक बहुत देर हो चुकी थी। न्यायालय के आदेश पर पुत्री का गर्भपात कराने के लिए सीएमओ के निर्देशन में टीम का गठन किया गया।
टीम ने न्यायालय को रिपोर्ट दी कि यदि गर्भपात कराया गया तो बेटी के जीवन को खतरा हो सकता है। इसे देखते हुए पुत्री ने पिता के दुष्कर्म से पैदा हुए बच्चे को जन्म दिया। एडीजीसी ने बताया कि जब मामला संज्ञान में आया तो उस समय पुत्री 28 सप्ताह 6 दिन की गर्भवती थी।
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