एसटीएफ के निरीक्षक हुकुम सिंह ने बताया कि धनेश मिश्रा ने 12 हजार रुपये महीने पर एक घर लिया था। यह तीन मंजिला है। इसमें भूतल पर दो कमरों में दुकान संचालित थी। जिसमें 4 युवतियां काम करती थीं। वह छात्रों से बात करती थीं। सुभारती यूनिवर्सिटी, मंगलायतन यूनिवर्सिटी, सिक्किम ओपन बोर्ड और सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी में प्रवेश दिलवाया जाता था। प्रवेश लेने वालों को परीक्षा में भी सुविधा दिलाने का वादा किया जाता था। अतिरिक्त रकम देने पर युवतियां कॉपियां लिख देती थीं। इसके बाद इन्हें संबंधित विश्वविद्यालय में भेज दिया जाता था।
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यूनिवर्सिटी से भी फर्जीवाड़े की आशंका
जुलाई में प्रवेश लेने वालों को 1 महीने बाद ही अगस्त में अंकतालिका तक दे दी जाती थी। ऐसे में यूनिवर्सिटी में भी फर्जीवाड़े की आशंका है। इस बारे में टीम जानकारी जुटा रही है। काम करने वाली युवतियों को 5 से 6 हजार रुपये प्रतिमाह मिला करते थे। एसटीएफ अब इन कर्मचारियों से भी पूछताछ करेगी। एसटीएफ ने आरोपी से जो कॉपियां बरामद की हैं, उनमें लिखावट एक जैसी है।
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नाैकरी वाले युवा अधिक
एसटीएफ के मुताबिक, धनेश के पास ऐसे युवा आते थे, जो किसी कारणवश पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते थे। अच्छी नाैकरी पाने के लिए बिना परीक्षा दिए अंकतालिका देने के लिए बात करते थे। इस पर तय रकम ले ली जाती थी। अंकतालिका मिलने के बाद आम नाैकरी में सत्यापन की भी आवश्यकता नहीं पड़ती थी। इससे ही फर्जीवाड़े का मामला सामने नहीं आ पाता था।
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