आगरा में फर्जी बैनामा और कूटरचित दस्तावेज बनाकर विनायक सहकारी समिति के सचिव गौरव भार्गव और पूर्व सचिव गोविंद प्रसाद भार्गव ने करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन बेच डाली। दाखिल खारिज से पहले पीड़िता को पता चल गया। पुलिस कमिश्नर से शिकायत और जांच के बाद शाहगंज में पुलिस ने केस दर्ज किया है।
बाईंपुर निवासी प्रेमवती ने पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार से शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा कि पति स्व. रामबाबू की खसरा संख्या 242 में 5 बीघा 8 बिस्वा पैतृक भूमि थी। इस जमीन में से 21 जनवरी 1992 को 2 बीघा 8 विस्वा भूमि विनायक सहकारी आवास समिति के सचिव गोविंद प्रसाद भार्गव को बेची गई।
बाकी 3 बीघा भूमि पर रामबाबू का कब्जा था। वर्ष 2003 में रामबाबू की मृत्यु हो गई। भूमि उनके व बेटे पुत्र नवल किशोर और राकेश के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हो गई। एसडीएम न्यायालय से भूमि का 11 मई 2009 को सरकारी बंटवारा हुआ। बंटवारा में खसरा संख्या 242/1 क्षेत्रफल 6910 वर्ग मीटर भूमि प्रेमवती, राकेश और नवल किशोर के हिस्से में आई। खसरा संख्या 242/2 क्षेत्रफल 5530 वर्ग मीटर भूमि श्रीविनायक सहकारी आवास समिति के हिस्से में आई। राजस्व टीम ने दोनों पक्षों का कब्जा व दखल 10 जून 2009 को कराया।
प्रेमवती के अनुसार उन्होंने व उनके पुत्रों ने अपने हिस्से की तीन बीघा भूमि वर्ष 2010 में शंकर इंडिया और सुयश टेड्रिंग मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड को बेच दी। तभी से दोनों कंपनियों का भूमि पर कब्जा है। इसके बाद विनायक सहकारी समिति के वर्तमान सचिव गौरव भार्गव व पूर्व सचिव गोविंद प्रसाद भार्गव ने जमीन के फर्जी कागजात बनवा लिए। उन्होंने सदर तहसील के रिकाॅर्ड रूम में जांच कराई तो वहां असली विलेख पत्र, स्याहा, जिल्द बही में फर्जी नाम मिले। इस मामले में पुलिस ने निबंधन विभाग के अज्ञात कर्मियों के खिलाफ भी केस दर्ज किया है।