इसके अलावा किसी पाठ्यक्रम के बंद होने पर उसमें दिए जाने वाले पदक को दूसरे पाठ्यक्रम में दिया जा सकता है। इसकी भी निर्धारित प्रक्रिया है। गत 10 वर्षों में करीब 13 पाठ्यक्रम बंद हो चुके हैं। लेकिन इन पाठ्यक्रमों के पदक किसी अन्य पाठ्यक्रम में नहीं दिए जा रहे।
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पदक दिए जाने की यह प्रक्रिया है
किसी सम्मानित व्यक्ति या संस्था के नाम से पदक दिए जाने का प्रस्ताव रखा जाता है। प्रस्ताव में यह भी बताना होता है कि किस पाठ्यक्रम में पदक दिया जाना है। पहले कुलसचिव के पास आवेदन करना होता है। इसके बाद प्रस्ताव को विद्या परिषद और कार्य परिषद में रखा जाता है।
इसमें यह देखा जाता है कि जिस व्यक्ति या संस्था के नाम पर पदक दिया जाना है, उसका शिक्षा व अन्य क्षेत्रों में क्या योगदान है। इसके बाद प्रस्ताव संस्तुति के साथ राज्य सरकार को भेजा जाता है, वहां से अध्यादेश जारी होने के बाद संबंधित पाठ्यक्रम में पदक दिया जाता है।
यदि कोई पाठ्यक्रम बंद हो जाता है, तो पदक को दूसरे पाठ्यक्रम में बदले जाने के लिए संबंधित प्रस्तावक के स्तर से फिर से वही प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। विश्वविद्यालय अपने स्तर से न तो कोई पदक बढ़ा सकता है और न ही कोई बदलाव कर सकता।
कई पाठ्यक्रमों के टॉपर्स को दीक्षांत समारोह में पदक नहीं मिलता, कारण संबंधित पाठ्यक्रमों में पदक नहीं है। पदक दिए जाने की प्रक्रिया लंबी है। चालू वर्ष में कोई नया पदक नहीं शामिल किया गया है। -डॉ. गिरिजाशंकर शर्मा, पीआरओ, विवि