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कूड़ा व्यवस्था: 3.50 करोड़ खर्च किए टैगिंग पर, 307 में से सिर्फ पांच मशीनें कर रहीं काम

Sat, 01 Aug 2020 11:25 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • पांच महीने से तो क्यूआर कोड स्कैन करने की व्यवस्था ठप ही पड़ी थी। तीन दिन पहले इसे फिर से चालू कराया गया।
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कमला नगर के घरों में लगे ऐसे टैग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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स्मार्ट सिटी योजना के तहत आगरा के 3.50 लाख घरों से कूड़ा उठाकर मोबाइल पर संदेश भेजने की व्यवस्था शुक्रवार को महज 389 घरों तक ही पहुंच पाई है। पिछले दो दिनों में आंकड़ा इससे भी कम था। इसकी वजह यह है कि घरों के बाहर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करने के लिए खरीदी गईं 307 मशीनों में से सिर्फ पांच ही काम कर रही हैं। इस प्रोजेक्ट पर 3.50 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।

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पांच महीने से तो क्यूआर कोड स्कैन करने की व्यवस्था ठप ही पड़ी थी। तीन दिन पहले इसे फिर से चालू कराया गया। क्यूआर कोड स्कैन न होने से यह पता ही नहीं चल पा रहा है कि कितने घरों से कूड़ा उठ रहा है और कितनों से नहीं। इस व्यवस्था में कूड़ा उठाए जाने के बाद घर के बाहर लगा क्यूआर कोड मशीन से स्कैन करने पर गृहस्वामी के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर मैसेज आ जाता है। लेकिन नगर निगम इन मशीनों (रेडियो फ्रीक्वेंसी टैग रीडर) का इस्तेमाल ही नहीं कर पा रहा है।


302 कार्ड रीडर हो रहे बर्बाद

नगर निगम ने सबसे पहले 17 अक्टूबर 2019 को रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन डिवाइस (आरएफआईडी) के जरिए क्यूआर कोड को स्कैन करने का काम शुरू किया था लेकिन निजी कंपनियों के कर्मचारियों ने इसे किया ही नहीं। कंपनियों की करार निरस्त होने के बाद नगर निगम ने 29 जुलाई से स्कैनिंग का काम शुरू करने का फैसला लिया। 
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अपर नगर आयुक्त केबी सिंह ने सभी सेनेटरी इंस्पेक्टरों को आदेश जारी किए थे कि कार्ड रीडर लेकर जिन घरों से कूड़ा उठ रहा है, वहां लगे टैग स्कैन करके रिपोर्ट भेजें। लेकिन यह व्यवस्था भी 3 दिन में फेल हो गई। 307 कार्ड रीडर में से केवल 5 कार्ड रीडर ही उपयोग में लाए जा सके। 302 कार्ड रीडर रखे-रखे बर्बाद हो रहे हैं।

डस्टबिन में चिप लगवाए, किसी काम न आए

स्मार्ट सिटी के तहत 350 से ज्यादा डस्टबिन में चिप भी लगाए गए हैं, जिससे वह 75 प्रतिशत भरने के बाद इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर को मैसेज दे देता। यह काम भी नहीं हो पाया। 

कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाए

मेयर नवीन जैन ने कहा कि हमारे पास जो व्यवस्था है, उसका अधिकतम उपयोग करके स्मार्ट तरीके से निगरानी की जाए। इसके लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाए और रोजाना मॉनिटरिंग करके जो समस्याएं आ रही हैं उनका निस्तारण किया जाए।

कर्मचारी इन मशीनों के लिए प्रशिक्षित नहीं

अपर नगर आयुक्त केबी सिंह ने कहा कि हमारे कर्मचारी इन मशीनों के लिए प्रशिक्षित नहीं है। उन्हें ट्रेनिंग नहीं दी गई कि मशीनों का इस्तेमाल कैसे करना है। कुछ मशीनों के जरिए सिखाने का प्रयास किया जा रहा है। रक्षाबंधन के बाद कर्मचारियों को प्रशिक्षित करके स्कैनिंग की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 
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