विश्वविद्यालय की रिपोर्ट के बाद कोर्ट के आदेश पर फेक डिग्री धारक 44 शिक्षकों को तत्कालीन बीएसए विजय प्रताप सिंह ने 26 फरवरी 2021 को बर्खास्त कर दिया था। वहीं 33 टेंपर्ड शिक्षकों को जांच पूरी होने तक बिना वेतन के ही कार्य करने के निर्देश दिए थे। सेवा से बाहर किए गए 44 में से 39 फेंक बीएड डिग्री धारक शिक्षक सुप्रीम कोर्ट चले गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने जांच पूरी होने तक उन्हें सेवा में रखने और वेतन देने के निर्देश एक जुलाई 2021 को जारी किए थे। मंगलवार को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने प्रताप सिंह बघेल ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार फेक डिग्री धारक 39 शिक्षकों का बर्खास्तगी आदेश स्थगित करते हुए उन्हें एक जुलाई 2021 से वेतन जारी करने के निर्देश जारी किए। बीएसए ने 27 अक्तूबर को फेक डिग्री धारक 39 शिक्षकों का बर्खास्तगी आदेश स्थगित कर दिया।
कब क्या हुई कार्रवाई
दो नवंबर 2017 एसआईटी ने फर्जी शिक्षकों की सूची जनपद भेजी।
15 नवंबर 2017 बीएसए ने बर्खास्तगी का प्रथम नोटिस जारी किया।
20 अगस्त 2018 बीएसए ने द्वितीय नोटिस जारी कर मांगा जवाब।
जून 2019 एसआईटी ने दूसरी सीडी बीएसए को भेजी ।
जुलाई 2019 खंड शिक्षाधिकारी को जांच के लिए विश्वविद्यालय भेजा।
21 सितंबर 2019- बीएसए ने तीसरा व अंतिम बर्खास्तगी नोटिस दिया
30 नवंबर 2019-74 शिक्षकों की बीएसए ने सेवा समाप्त कीं।
26 फरवरी 2021 को फेक डिग्री वाले शिक्षक सेवा से बाहर किए गए।
27 अक्तूबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बर्खास्तगी आदेश स्थगित।
सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के निर्देश पर एसआईटी सूची में शामिल फेक बीएड डिग्री धारक 39 शिक्षकों का बर्खास्तगी आदेश स्थगित किया जाता है। शासनादेश के तहत उन्हें वेतन भी जारी किया जाएगा। 44 में से पांच शिक्षक सुप्रीम कोर्ट की याचिका में शामिल नहीं थे, इसलिए उस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।
- कमल सिंह, बीएसए
अहोई अष्टमी 2021: राधाकुंड में स्नान के लिए पहुंचे दंपती, तीन डुबकी लगाने से मिलता है संतान प्राप्ति का आशीर्वाद