वृंदावन में श्रावण मास से पूर्व ब्रजभूमि पर विश्व शांति प्रार्थना के साथ 41 दिवसीय पार्थिव शिवलिंग निर्माण, अभिषेक भक्ति महोत्सव का शुभारम्भ हो गया। महोत्सव का शुभारम्भ राम कथा प्रवक्ता संत विजय कौशल महाराज एवं कथा प्रवक्ता देवकीनंदन महाराज ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। शिव भक्तों ने पहले दिन एक लाख 11 हजार पार्थिव शिवलिंग बनाकर शिव आराधना प्रारम्भ की। कोविड से मृतक जनों की आत्मिक शांति हेतु भागवत कथा का वाचन हुआ।
जैंत थाने के सामने शुक्रवार को आयोजन स्थल मेरौ ब्रज पर महिला श्रद्धालुओं ने मंगल कलश स्थापित किए। संत विजय कौशल महाराज ने व्यासपीठ पूजन कर कहा कि वृंदावन सीमा की सम्पूर्ण भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के पद्चिन्ह आज भी विराजमान हैं। इसी ब्रजभूमि पर भगवान भोलेनाथ ने अर्द्धनारीश्वर का स्वरूप रखकर कृष्णभक्ति की है।
भागवताचार्य देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने श्रद्धालुओं के साथ पार्थिव शिवलिंग बनाकर एक करोड़ 51 लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण-अभिषेक का संकल्प लिया। इससे पूर्व श्रद्धालुओं ने ‘सुखी बसे संसार सब, दुखिया रहे ना कोय....’’ गाकर विश्व में शांति की प्रार्थना की।
देवकीनंदन महाराज ने कहा कि इसे स्वंय परमात्मा ने अपने मुख में धारण किया है। ब्रजरज शरीर पर लपेटकर बाबा भोलेनाथ कन्हैया से मिलने आये थे। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग अभिषेक-पूजन का विशेष महत्व है। ब्रजरज से पार्थिव शिवलिंग निर्माण शिव को प्रसन्न करने वाला अनुष्ठान है। उन्होंने कहा कि आयोजन की पहली भागवत कथा उन मृतकात्माओं की शांति को समर्पित हैं, जिनकी कोरोना महामारी में अकाल मृत्यु हो गई।
इस दौरान यजमान सुधीर कुमार, कुमुदनी वर्मा, सुबीर वर्मा, सिद्धार्थ, पुष्पा पाण्डेय, शंकर वर्मा, नीरज, आंचल ने व्यासपीठ की आरती उतारी। विश्व शांति सेवा चैरीटेबल ट्रस्ट सचिव विजय शर्मा, गजेन्द्र सिंह, विपिन वाजपेयी, विष्णु शर्मा, आचार्य इन्द्रेश शरण शास्त्री, चन्द्रप्रकाश शर्मा मौजूद रहे।