मरीज की हालत के अनुसार इलाज
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि डेंगू से निपटने के लिए पैथोलॉजी, मेडिसिन, बाल रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम बनाई गई। इससे गंभीर मरीजों का इलाज आसान हो गया। जरूरत पर अन्य विशेषज्ञों की भी मदद ली गई। मरीज की हालत की निगरानी करने के बाद जंबो पैक, प्लाज्मा भी दिया गया। इससे हमारे यहां ठीक होने की दर बेहतर रही।
80 हजार प्लेटलेट्स पर भी जंबो पैक
लोकहितम ब्लड बैंक के निदेशक अखिलेश अग्रवाल ने कहा कि जंबो पैक के लिए ऐसी भी डिमांड आईं, जिनकी 80 हजार प्लेटलेट्स थीं। तीमारदार डोनर लाकर जंबो पैक भी लेकर गए। सितंबर और अक्तूबर में मामले अधिक बढ़ने पर ज्यादा मांग रही।
एहतियातन भी जंबो पैक चढ़ाया गया
अध्यक्ष आईएमए डॉ. राजीव उपाध्याय ने बताया कि रक्तस्राव होने पर मरीजों को जंबो पैक दिया। कई बार 60-80 हजार प्लेटलेट्स पर भी एहतियातन जंबो पैक मरीजों को चढ़ाया गया। कई बार तीमारदारों ने भी पहल की।
दस हजार प्लेटलेट्स की है गाइड लाइन
एसएन कॉलेज की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. नीतू चौहान ने बताया कि सरकारी गाइडलाइन के अनुसार 10 हजार प्लेटलेट्स से कम होने पर मरीज को जंबो पैक लगाया जाना है। नाक, मुंह व अन्य स्थानों से रक्तस्राव होने पर प्लेटलेट्स की यह संख्या मायने नहीं रखती। ऐसी स्थिति में प्लेटलेट्स ज्यादा होने पर भी जंबो पैक लगाया जाता है।