आगरा। बिजली के बिना नापतौल उपकरण तराजू-बाट, मीटर, लीटर आदि पर जीएसटी की दर 18 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी करने की मांग नेशनल चैंबर ने उठाई है। चैंबर अध्यक्ष मनीष अग्रवाल ने वित्त मंत्री को आगामी बजट से पहले दिए सुझाव में कहा है कि छोटे दुकानदार, रेहड़ी पटरी विक्रेता, ठेल-धकेल और दूधियों द्वारा माप तौल उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 18 फीसदी जीएसटी का बोझ उनसे हटाया जाए, ताकि छोटे दुकानदारों, गरीब तबके के विक्रेताओं को राहत मिल पाए।
चैंबर के जीएसटी प्रकोष्ठ चेयरमैन अमर मित्तल के मुताबिक नापतौल उपकरणों को बनाने वाले निर्माता को बाट माप विभाग से परीक्षण, मुद्रांकन जरूरी है। उसका शुल्क क्षमता के मुताबिक अलग अलग होता है। इस पर भी 18 फीसदी जीएसटी लगाई जाती है। इस तरह यह दोहरा कराधान है। गरीबों के लिए यह महंगा है। देश में केवल 20 करोड़ का ही राजस्व इससे मिल रहा है। इसलिए जीएसटी की दर घटाने से सरकार के राजस्व में ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन गरीब दुकानदारों को इससे राहत मिलेगी।