विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के डॉ. बीएस चंदेल ने बताया कि ओमिक्रॉन वैरिएंट पर अभी स्टडी चल रही है, शुरूआत स्टडी में इसके संक्रमित होने की दर डेल्टा वैरिएंट से दो से तीन गुना अधिक है। जानलेवा कितना है और कितना घातक साबित होगा, इसकी अभी सही स्टडी नहीं है। ऐसे में बचाव और टीकाकरण ही बेहतर विकल्प है।
एसएन के वक्ष एवं क्षय रोग विभाग के डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि सांस रोगी और दूसरी लहर में संक्रमित होने पर गंभीर हाल के लोगों को डेल्टा वैरिएंट से खतरा अधिक है। यह फेफड़ों में तेजी से प्रभावित करता है, जिससे यह ओमिक्रॉन के मुकाबले ज्यादा जानलेवा है। ऐसे में इनको विशेष सावधानी बरतनी है।