डेल्टा पहली लहर के वायरस से 65 गुना खतरनाक
एसएन कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. आरती अग्रवाल ने बताया कि जीनोम सीक्वेंसिंग में पता चला कि डेल्टा वैरिएंट पहली लहर के वायरस से लगभग 65 गुना ज्यादा खतरनाक मिला। यह वैरिएंट फेफड़ों तक तेजी से फैला, जिससे फेफड़े खराब हुए। इससे ऑक्सीजन का स्तर कम हुआ और मरीजों की हालत गंभीर होती गई।
फेफड़ों पर ज्यादा प्रभाव पड़ा
एसएन के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अंकुर गोयल ने बताया कि दूसरी लहर में डेल्टा वैरिएंट उनके लिए ज्यादा खतरनाक रहा, जिनको गंध-स्वाद पहले की तरह ही रहा, वायरस नाक की नलिकाओं के रास्ते से फेफड़ों तक पहुंच गया था। तीसरी लहर में किस वैरिएंट का वायरस होगा, अभी बताया नहीं जा सकता, बस सावधानी जरूरी है।
यह बरतें सावधानी
- 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोग टीकाकरण कराएं।
- बच्चों को सार्वजनिक स्थानों पर ले जाने से बचें।
- विशेष जरूरत पर ही घर से बाहर जाएं।
- दो मास्क लगाकर जाएं तो बेहतर होगा।
- पौष्टिक भोजन करें, नियमित योग-व्यायाम करें।
- हाथों की साफ-सफाई, एक मीटर दूरी का पालन करें।
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