फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नाइजीरियन गैंग ने फर्जी दस्तावेजों से खुलवाए थे 40 बैंक खाते, 10 साल में 250 करोड़ की ठगी

Sat, 15 Aug 2020 12:02 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • रेंज साइबर सेल की जांच में चला पता, 15 खातों को एक साल पहले गुजरात पुलिस ने कराया था होल्ड 
विज्ञापन
आगरा पुलिस ने पकड़ा नाइजीरियन गैंग - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

फर्जी वेबसाइट और फेसबुक पर फर्जी आईडी बनाकर लोगों से 10 साल में 250 करोड़ की ठगी करने वाले नाइजीरियन गैंग ने फर्जी दस्तावेजों की मदद से 40 खाते खुलवाए थे। रेंज साइबर सेल की जांच में यह सामने आया है। यह सभी निजी बैंकों में खोले गए थे। एक साल पहले गुजरात में लोगों से धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने 15 खातों को होल्ड भी कराया था, लेकिन खातों में फर्जी दस्तावेज लगाए जाने के कारण पुलिस गैंग को नहीं पकड़ सकी। 

विज्ञापन


आगरा रेंज साइबर सेल की टीम ने बुधवार को नाईजीरियन गैंग के सदस्य गुड्स टाइम संडे उर्फ बेंशन, गाजियाबाद निवासी तरुण यादव, संभल निवासी आसिफ और जसपाल को गिरफ्तार किया था। गुड्स टाइम संडे सहित अन्य के पास से पुलिस ने 75 बैंक पासबुक बरामद की थीं। 


इन पासबुक में करोड़ों के लेन-देन की जानकारी है। अब पुलिस इन बैंकों से खातों को होल्ड कराकर पिछले सालों में हुए लेन-देन के बारे में पड़ताल करने में लगी है। एक आरोपी की 15 आईडी पुलिस को मिली थी। इनकी मदद से आरोपी ने खाते खुलवाए थे। गैंग के सरगना सहित अन्य आरोपियों की पुलिस तलाश कर रही है। 

विज्ञापन

सरकारी और निजी बैंकों में खोले खाते 

रेंज साइबर सेल के मुताबिक, गैंग ने खाते उत्तर प्रदेश के संभल, मुरादाबाद, गोरखपुर और बिहार के जिलों की बैंकों में खोले थे। इन जिलों की ही पासबुक पुलिस को मिली हैं। बैंकों में भी भारतीय स्टेट बैंक के अलावा देना बैंक, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, आईडीबीआई आदि बैंक शामिल हैं।  इनमें से 40 खातों के फर्जी दस्तावेज से खोले जाने की जानकरी मिली है। इस वजह से ही धोखाधड़ी होने के बाद पुलिस गैंग को नहीं पकड़ पा रही थी। 

नहीं पकड़ पाई थी गुजरात पुलिस  

रेंज साइबर सेल के मुताबिक, गुजरात में लाखों की धोखाधड़ी के मामले में वहां की साइबर सेल जांच में लगी थी। तब 15 खातों की जानकारी साइबर सेल को लगी थी। इनमें रकम जमा की गई थी। पुलिस ने बैंकों से संपर्क करके खातों को होल्ड करा दिया था। इन खातों में फर्जी दस्तावेज लगाए गए थे। 

किसी में पहचानपत्र तो किसी में पते का प्रमाणपत्र गलत था। इस कारण पुलिस आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी थी। गिरफ्त में आए आरोपियों ने बताया कि पूर्व में एक राज्य की पुलिस ने पकड़ भी लिया था। मगर, कोई साक्ष्य नहीं थे। इस कारण कोई कार्रवाई नहीं की थी। इस पर सदस्यों को छोड़ दिया गया। 
विज्ञापन

इंटरनेशनल खातों में सरगना जमा कराता हैं रकम 

रेंज साइबर सेल की पूछताछ में आरोपी गुड्स टाइम संडे ने बताया कि सरगना स्टेनले ने खाते खुलवाने के बाद सदस्यों को एटीएम कार्ड दे रखे थे। खातों में रकम जमा होने के आधा घंटे के अंदर एटीएम कार्ड की मदद से खातों से रकम निकाल ली जाती है। इसके बाद सरगना रकम कैश में लेता था। सरगना ने एक इंटरनेशनल खाता खोल रखा है। इसकी मदद से रकम को अपने देश भेज देता है। 

खातों में रकम एटीएम से जमा करता था, जिससे बैंक नहीं जाना पड़े। इसमें पकड़े जाने का भी डर नहीं रहता है। आरोपी गुड्स टाइम संडे के लैपटॉप में इंटरनेशनल खाते का एक ईमेल मिला है, जिसमें रकम ट्रांसफर होने की जानकारी भी है। अब पुलिस का अनुमान है कि सरगना के पास ऐसे कई मेल होंगे। 

खातों में जमा रकम को होल्ड कराएगी पुलिस 

गैंग के सदस्यों से 75 पासबुक पुलिस को मिली हैं। पुलिस अब बैंकों से संपर्क कर कर रही है, जिससे इन खातों को होल्ड कराया जा सके। रेंज साइबर सेल का कहना है कि जिन खातों की मदद से आरोपियों ने धोखाधड़ी की है, यह केस प्रॉपर्टी बन गए हैं। इसलिए बैंकों को ईमेल भेजकर निवेदन किया जाएगा कि इनका लेनदेन रोका जाए। पैसे को होल्ड कर दिया जाए। 

ये हैं फरार 
जॉन स्टेनले निवासी नाईजीरिया हाल पता नई दिल्ली (सरगना), डिक्सन उर्फ स्मॉल, वीटा इनलॉ, फ्रांसिस, स्टाइलिश, बैंशन निवासी नई दिल्ली।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें