सतेंद्र की हत्या की जांच में सिर्फ कालेज संचालक ओमेंद्र यादव की करतूतें उजागर नहीं हुई हैं, विश्वविद्यालय का भ्रष्टाचार से भरा सिस्टम भी एक बार फिर बेपरदा हुआ है।
पुलिस जांच में पाया गया कि यहां फीस का बड़ा फर्जीवाड़ा चल रहा है। कालेजों को कोड एसएमएस पर दिए जा रहे हैं। रात में लाग इन आईडी खुल जाती है और सुबह बंद हो जाती हैं। अब इस पूरे खेल की जांच अलग से कराई जा रही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह खेल पिछले दो साल में तेज हुआ है। इससे पहले इक्का दुक्का ही मामले रहते थे। इसके बाद कोड का खेल शुरू हुआ। दरअसल, कोड के जरिए कालेज संचालक अपने कालेज की लाग इन आईडी खोल सकते हैं। कोड तभी दिया जाता है, जब कालेज की पूरी फीस जमा हो। लेकिन, यहां ऐसा नहीं हो रहा था। कई कालेजों को बगैर फीस जमा कराए कोड मिल गए। कई ऐसे हैं, जिनके लाग इन लिखा पढ़ी में बंद हैं, लेकिन रात को खोल दिए जाते हैं। इस खेल में अधिकारी शामिल हैं। अधिकारी ही लिपिकों को एसएमएस करते हैं कि किसका लाग इन खोलना है? और किसका बंद करना है? एसपी सिटी सुशील घुले का कहना है कि इस पूरे खेल की जांच कराई जा रही है। जल्द ही सभी तथ्य सामने आ जाएंगे।
हड़ताल खत्म पर चुप नहीं बैठेगा कर्मचारी संघ
आगरा। हत्यारोपी ओमेंद्र यादव के सरेंडर करने पर भले ही कर्मचारियों ने हड़ताल समाप्त कर दी हो, लेकिन कर्मचारी संघ अभी चुप नहीं बैठेगा। आरोपी के पांच कालेजों की जांच के लिए राज्यपाल को पत्र लिखा जाएगा। साथ ही कागजों पर चल रहे कालेजों की संबद्धता के लिए भी अभियान चलेगा। सोमवार दोपहर करीब 12:30 बजे विश्वविद्यालय में धरना दे रहे कर्मचारियों के पास थाना हरीपर्वत पुलिस पहुंची। पुलिस ने आरोपी के मैनपुरी कोर्ट में सरेंडर किए जाने की बात बता हड़ताल खत्म करने की अपील की। सूचना की पुष्टि होने के बाद दोपहर चार बजे के करीब कर्मचारी संघ ने हड़ताल और शाम को घोषित कैंडल मार्च निरस्त करने की घोषणा की। शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अखिलेश चौधरी का कहना है कि आलाधिकारियों के निर्देश पर भ्रष्टाचार पनप रहा है। हत्यारोपी के कालेजों की संबद्धता समाप्त करने के लिए कुलपति को ज्ञापन दिया जाएगा।