जब पूरे प्रदेश में अवैध रूप से शराब की बिक्री और तस्करी रोकने के लिए
अभियान चलाया जा रहा है तभी शमसाबाद के दो गांवों में देसी शराब ने कहर
बरपाया। तीन लोगों की मौत हो गई और पांच लोगों की हालत गंभीर है। मामले में
डीआईजी ने संबंधित हल्का इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया। गांवों में
छापेमारी कर देसी शराब की बिक्री को बंद कराने के निर्देश दिए हैं। मामले
की जांच सीओ टूंडला को सौंपी गई है।
शमसाबाद के गांव गढ़ी खांडेराव में
26 जून को शराब पीने से गोरेलाल और सिद्धार्थ की मौत हो गई, जबकि तीन
लोगों की हालत बिगड़ गई। अगले ही दिन यहां के गांव इसौली का पुरा में भी एक
ग्रामीण की देसी शराब पीने से मौत हो गई, जबकि दो की हालत बिगड़ गई। पुलिस
ने एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज करके कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी।
गांवों में खुलेआम आइसक्रीम की तरह बेची जाने वाली देसी शराब पर पुलिस ने
आंखें मूंद रखी हैं, जबकि पंचायत चुनाव के मद्देनजर प्रदेशभर में अवैध शराब
पर अंकुश लगाए जाने को अभियान चलाया जा रहा है।
इसौली के लोगों ने
बताया कि शराब खेरागढ़ के गांव बीकापुर में तैयार कराई जा रही थी। पुलिस को
शराब माफिया के ठिकाने और धंधे के बारे में जानकारी है। इसके बाद भी पुलिस
ने गांवों में देसी शराब बनाकर हरियाणा और राजस्थान की शराब बताकर बेचने
वाले माफिया पर कोई कार्रवाई नहीं की। डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने इस मामले में
शमसाबाद के हल्का इंचार्ज को लाइन हाजिर करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने बताया कि एसएसपी को निर्देशित किया गया है कि बार्डर के गांवों
में शराब की बिक्री और तस्करी पर अंकुश लगाने को छापेमारी की जाए। साथ ही
शराब बेचने वाले अन्य ग्रामीणों को भी मुकदमे में नामजद किया जाए।
तीन की हालत अभी गंभीर
देसी
शराब पीने से शमसाबाद के खेमचंद, नेमीचंद और सुनील की हालत बिगड़ गई थी।
उनका इलाज आगरा एक अस्पताल में चल रहा है। नेमीचंद को आंखों की रोशनी चली
गई है। तीनों की हालत अभी गंभीर बनी हुई है।