संक्रमण तेज होने के कारण ही एसएन मेडिकल कॉलेज में नए आइसोलेशन वार्ड बनाए जा रहे हैं और वेंटीलेटर बढ़ाए जा रहे हैं। गनीमत यह है कि मृत्यु दर नहीं बढ़ी है।
सितंबर की संक्रमण की रफ्तार तेज है। चिंता की बात यह भी है कि ठीक होने की दर पहले से कम रह गई है। एक से 21 सितंबर तक 2028 संक्रमित मिले हैं। इस दौरान 1533 लोग ठीक हुए हैं। हर रोज 96 लोग संक्रमित हो रहे हैं जबकि 73 ठीक हो रहे हैं। ठीक होने की दर में दो फीसदी से ज्यादा की कमी आई है जबकि संक्रमण की दर में लगभग आधा प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
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इसका खतरा यह है कि मरीजों के उपचार के लिए व्यवस्थाएं भी उतनी ही तेजी से करनी पड़ रही हैं। संक्रमण तेज होने के कारण ही एसएन मेडिकल कॉलेज में नए आइसोलेशन वार्ड बनाए जा रहे हैं और वेंटीलेटर बढ़ाए जा रहे हैं।
गनीमत यह है कि मृत्यु दर नहीं बढ़ी है। सितंबर में 11 लोगों की जान गई है। इस तरह देखें तो दो दिन में एक का औसत है। एक सितंबर तक 107 संक्रमितों की मौत हुई थी। 21 सितंबर तक आंकड़ा 118 तक पहुंचा।
जांच बढ़ने से संक्रमित बढ़े
जांच ज्यादा हो रही है, इसलिए ज्यादा संक्रमित मिल रहे हैं। संक्रमितों की संख्या बढ़ जाने के कारण ठीक होने वालों का प्रतिशत कम हुआ है। इसी के मद्देनजर व्यवस्थाएं की जा रही हैं - डॉ आरसी पांडे, सीएमओ
बुजुर्गो के ठीक होने में ज्यादा समय लग रहा
अगस्त तक बुजुर्ग और अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों में संक्त्रस्मण कम मिल रहा था, लेकिन अब ऐसे लोग संक्त्रस्मित ज्यादा होने लगे हैं, इससे के आंकड़े बदले हैं, र इनके ठीक होने में दिन भी ज्यादा लग रहे हैं, इस कारण भी ठीक होने वाली दर में कमी आई है। डॉ राजीव उपाध्याय. निर्वाचित अध्यक्ष आईएमए
अब ज्यादा सतर्क रहना होगा
संक्रमण की गति तेज है, ऐसे में लोगों को ज्यादा सतर्क रहना होगा। बेवजह घर से न निकलें, मास्क पहनकर रहें, छह फुट की दूरी बनाकर रखें तभी कोरोना से लड़ा जा सकता है। बुुजुर्ग और बच्चों में प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उनके ठीक होने में ज्यादा समय लगता है - डॉ. सुनील शर्मा, वरिष्ठ फिजिशियन