पीड़िता के पिता का देहांत 19 मार्च 2021 को हो गया, जिसके बाद ये सभी बहनें संपत्ति की मालिक हुई और अपने-अपने हिस्से पर कब्जा ले लिया। ललिता के सगे चाचा गोपाल प्रसाद शुक्ला और उनके पुत्र आदित्य शुक्ला ने करोड़ों रुपये की संपत्ति को हड़पने के लिए षड्यंत्र रचा और शहर के अस्पताल से एक फर्जी डिस्चार्ज स्लिप बनवाई।
आरोप है कि मुरलीधर को अस्पताल में भर्ती होना दर्शाया, जबकि पीड़िता का कहना है कि इस दिन रजिस्ट्रार छाता के कार्यालय में वसीयत पंजीकरण के वक्त वे खुद मौजूद रहे। उनकी फोटो और अंगूठा निशानी बायोमैट्रिक मशीन पर हुए थे।
यह लगाया आरोप
आरोप है कि पिता-पुत्र ने जमीन हड़पने के लिए वसीयत के गवाहों को भी प्रलोभन देकर उनसे शपथपत्र लिखवा लिए। आदित्य शुक्ला ने इन फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से न्यायालय में वाद दायर किया और अपने नाम के दत्तक ग्रहण के आधार पर मुरलीधर की संपत्तियों का उत्तराधिकारी बनाकर उन्हें हड़पने का प्रयास किया। पीड़िता ने बताया कि पूरा मामला करीब 22-23 बीघा खेत और अन्य संपत्तियों का है।