नागरिकता संशोधन विधेयक ने एक वर्ग विशेष के बीच हलचल बढ़ा दी है। तमाम लोग इसका विरोध भी कर रहे हैं। लेकिन इस विरोध के बीच जिन लोगों ने अब तक अपने पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड नहीं बनवाए थे, उन्होंने बनवाना शुरू कर दिया है।
आगरा जिले में स्थिति यह है कि जब से इस विधेयक की चर्चा ने जोर पकड़ा है, तब से लगभग 25 फीसदी तक आधार कार्ड बनवाने वाले आवेदकों की संख्या में इजाफा हुआ है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जिले की आबादी 44.18 लाख से अधिक है। इसमें से अब तक 30 लाख से अधिक के आधार कार्ड बन चुके हैं। ऐसे में शेष लोगों को अपनी पहचान के लिए प्रमाण पत्र का संकट सताने लगा है।
कई क्षेत्रों में नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर चर्चा है कि जिसके पास आधार कार्ड नहीं होगा, उन्हें शरणार्थी घोषित कर दिया जाएगा। इसी डर से अब आधार कार्ड बनवाने वालों की लाइन लग गई है। स्थिति यह है कि लोग अपना ही नहीं, अपने बच्चों का भी आधार कार्ड बनवाने पर जोर दे रहे हैं।
नाम में करा रहे संशोधन
शहर में आधार कार्ड बनाने के लिए यूआईडीएआई दो अगस्त से कार्य कर रही है। तब से अब तक लगभग 57 हजार आधार कार्ड बनाए जा चुके हैं। इसमें से 25 हजार नये आधार कार्ड हैं।
वहीं, 32 हजार संशोधित कार्ड हैं। लोग कोई रिस्क मोल नहीं लेना चाहते। वो वोटर कार्ड के हिसाब से अपना आधार कार्ड बनवा रहे हैं। ताकि पहचान पत्र के रूप में कोई गड़बड़ी न हो।
हर रोज बन रहे 560 आधार
यूआईडीएआई के ऑपरेशन मैनेजर ओमवीर सिंह ने बताया कि नागरिकता संशोधन विधेयक की जब से चर्चा हुई तब से लगभग 25 फीसदी तक आवेदनों की बढ़ोत्तरी हुई है। पहले प्रतिदिन लगभग 450 आधार कार्ड बनते थे, अब 560 से अधिक बन रहे हैं। - ओमवीर सिंह, ऑपरेशन मैनेजर, यूआईडीएआई
150 लोग आ रहे प्रतिदिन सत्यापन के लिए
पार्षद शरद चौहान ने बताया कि निवास स्थान सत्यापन के लिए अब हर रोज क्षेत्र के लगभग 150 लोग आ रहे हैं। जबकि पिछले महीने तक इसकी संख्या बमुश्किल 50 से 60 की रहती थी।
बच्चों के भी बनवा रहे आधार
पार्षद राहुल चौधरी ने बताया कि अब लोग आधार कार्ड में अपने नाम संशोधन के साथ ही अपने बच्चों के आधार कार्ड बनवाने के लिए भी जागरूक हुए हैं। बड़ी संख्या में सत्यापन कराने आ रहे हैं।